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Aarti Kunj Bihari Ki Lyrics भगवान श्री कृष्ण की सबसे प्यारी और लोकप्रिय आरती में से एक है| यह आरती खासकर वृंदावन और गोविंद देव जी जेसे श्री कृष्ण के अन्य मंदिरों में गाई जाती हैं| “कुंज बिहारी” का मतलब होता हैं वृंदावन में रहने वाले प्यारे बालक, यानी भगवान कृष्ण अपनी लीलाओं, मुरली की धुन और राधा के साथ प्रेम के लिए जाने जाते हैं| 

जब भक्त श्रद्धा और भक्ति से इस आरती का गायन करते हैं, तो मन में शान्ति और सकारात्मक/अच्छी ऊर्जा फैलती है| इसे गाकर भक्त भगवान कृष्ण के साथ अपने दिल का रिश्ता मज़बूत करते हैं, और उनके आशीर्वाद की अनुभूति पाते हैं|

Aarti Kunj Bihari Ki Lyrics इतने आसान और मधुर शब्दों में हैं कि बच्चे से लेकर बड़े तक सभी इसे आसानी से गा या सुन सकते हैं। मंदिर, घर या किसी भी साफ़ और शांत जगह पर इसे आरती से वातावरण पवित्र हो जाता है और मन को सुख और शान्ति मिलती है।

Intro Kunj Bihari / कुंज बिहारी जी का परिचय 

कुंज बिहारी जी, भगवान श्री कृष्ण का वो रूप हैं जो वृंदावन की सुंदर कुंज गलियों में राधारानी संग विहार करते हैं। “कुंज” का मतलब है हरे-भरे बगीचे और “बिहारी” का मतलब है खेलने-घूमने वाले। यानी, कुंज बिहारी जी वही नटखट कान्हा हैं जो बांसुरी की धुन से सबका मन मोह लेते हैं।

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जब कृष्ण अपनी बांसुरी बजाते थे तो गोपियाँ अपनी सारी चिंताएँ भूलकर उनकी ओर खिंची चली आती थीं। वृंदावन का हर पत्ता, हर गली और हर बूँद उनके नाम से रसमय हो जाती थी। भक्त मानते हैं कि कुंज बिहारी जी सिर्फ देवता नहीं, बल्कि सच्चे दोस्त, रक्षक और प्रेम के प्रतीक हैं।

कुंज बिहारी जी के दर्शन से मन को शान्ति मिलती है और हृदय प्रेम और भक्ति से भर उठता है। जब हम “आरती कुंज बिहारी की लिरिक्स” गाते हैं, तो ऐसा लगता है मानो हम सीधे वृंदावन की गलियों में पहुँच गए हों और सामने खड़े श्री कृष्ण मुस्कुराकर अपनी बांसुरी से हमें बुला रहे हों।

Aarti Kunj Bihari Lyrics Hindi

आरती कुंज बिहारी की श्री गिरधर कृष्ण मुरारी की
आरती कुंज बिहारी की श्री गिरधर कृष्ण मुरारी की
आरती कुंज बिहारी की श्री गिरधर कृष्ण मुरारी की
आरती कुंज बिहारी की श्री गिरधर कृष्ण मुरारी की

गले में बैजंती माला, बजावे मुरली मधुर बाला
श्रवण में कुंडल झलकला, नंद के आनंद नंदलाला
गगन सम अंग कांति काली, राधिका चमक रही आली
लटन में ठाढ़े बनमाली

भ्रमर सी अलक, कस्तूरी तिलक, चन्द्र सी झलक
ललित छवि श्यामा प्यारी की
श्री गिरधर कृष्ण मुरारी की
आरती कुंज बिहारी की, श्री गिरधर कृष्ण मुरारी की
आरती कुंज बिहारी की, श्री गिरधर कृष्ण मुरारी की

कनकमय मोर मुकुट बिलसे, देवता दरसन को तरसे
गगन सो सुमन रासी बरसे
बाजे मुरचंग, मधुर मृदंग, ग्वालिन गाया
वास्तविक रति गोप कुमारी की, श्री गिरधर कृष्ण मुरारी की
आरती कुंज बिहारी की, श्री गिरधर कृष्ण मुरारी की
आरती कुंज बिहारी की, श्री गिरधर कृष्ण मुरारी की

जहां ते प्रगट भयि गंगा, कलुष कलि हारिणी श्री गंगा
स्मरण ते होत मोह भंगा
सि शिव शीश जटा के बीच, हरे अघ कीच चरण छवि श्री बनवारी की
श्री गिरधर कृष्ण मुरारी की
आरती कुंज बिहारी की, श्री गिरधर कृष्ण मुरारी की
आरती कुंज बिहारी की, श्री गिरधर कृष्ण मुरारी की
आरती कुंज बिहारी की, श्री गिरधर कृष्ण मुरारी की

चमकती उज्जवल तात रेनू, बज रही वृन्दावन बेनु
चाहु दिसि गोपी ग्वाल धेनु, हंसत मृदु मंद चांदनी चंद्र कटत भव फंद

तेर सुन दीन भिखारी की श्री गिरधर कृष्ण मुरारी की
आरती कुंज बिहारी की श्री गिरधर कृष्ण मुरारी की
आरती कुंज बिहारी की श्री गिरधर कृष्ण मुरारी की
आरती कुंज बिहारी की, श्री गिरधर कृष्ण मुरारी की
आरती कुंज बिहारी की श्री गिरधर कृष्ण मुरारी की
आरती कुंज बिहारी की श्री गिरधर कृष्ण मुरारी की

Aarti Kunj Bihari Lyrics English 

Aarti Kunj Bihari Ki Shri Girdhar Krishna Murari Ki
Aarti Kunj Bihari Ki Shri Girdhar Krishna Murari Ki
Aarti Kunj Bihari Ki Shri Girdhar Krishna Murari Ki
Aarti Kunj Bihari Ki Shri Girdhar Krishna Murari Ki

Gale Mein Baijanti Mala, Bajave Murali Madhur Bala
Shravan Mein Kundal Jhalakala, Nand Ke Anand Nandlala
Gagan Sam Ang Kanti Kali, Radhika Chamak Rahi Aali
Latan Mein Thadhe Banamali

Bhramar Si Alak, Kasturi Tilak, Chandra Si Jhalak
Lalit Chavi Shyama Pyari Ki
Shri Girdhar Krishna Murari Ki
Aarti Kunj Bihari Ki Shri Girdhar Krishna Murari Ki
Aarti Kunj Bihari Ki Shri Girdhar Krishna Murari Ki

Kanakmay Mor Mukut Bilse, Devata Darsan Ko Tarse
Gagan So Suman Raasi Barse
Baje Murchang, Madhur Mridang, Gwaalin Sang
Atual Rati Gop Kumaari Ki Shri Girdhar Krishna Murari Ki
Aarti Kunj Bihari Ki Shri Girdhar Krishna Murari Ki
Aarti Kunj Bihari Ki Shri Girdhar Krishna Murari Ki

Jahaan Te Pragat Bhayi Ganga, Kalush Kali Haarini Shri Ganga
Smaran Te Haut Moh Bhanga

Basi Shiv Shish, Jataa Ke Beech, Harei Agh Keech Charan Chhavi Shri Banvaari Ki
Shri Girdhar Krishna Murari Ki
Aarti Kunj Bihari Ki Shri Girdhar Krishna Murari Ki
Aarti Kunj Bihari Ki Shri Girdhar Krishna Murari Ki
Aarti Kunj Bihari Ki Shri Girdhar Krishna Murari Ki

Chamakati Ujjawal Tat Renu, Baj Rahi Vrindavan Benu
Chahu Disi Gopi Gwaal Dhenu Hansat Mridu Mand, Chandani Chandra, Katat Bhav Phand

Ter Sun Deen Bhikhaaree Ki, Shri Girdhar Krishna Murari Ki
Aarti Kunj Bihari Ki, Shri Girdhar Krishna Murari Ki
Aarti Kunj Bihari Ki, Shri Girdhar Krishna Murari Ki
Aarti Kunj Bihari Ki, Shri Girdhar Krishna Murari Ki
Aarti Kunj Bihari Ki, Shri Girdhar Krishna Murari Ki
Aarti Kunj Bihari Ki, Shri Girdhar Krishna Murari Ki

Importance and Devotion of Aarti Kunj Bihari Lyrics’s 

“Aarti Kunj Bihari Ki Lyrics” भगवान श्री कृष्ण की सबसे प्रसिद्ध आरतियों में से एक है। यह आरती ब्रजभूमि यानी मथुरा–वृंदावन से जुड़ी है और हर दिन मंदिरों में गाई जाती है। इसमें श्री कृष्ण जी को “कुंज बिहारी” नाम से पुकारा गया है, क्योंकि वे वृंदावन की सुंदर कुंजों (बग़ीचों) में रास रचाते थे।

इस आरती को गाने का सबसे बड़ा महत्व यह है कि यह भक्त और भगवान के बीच गहरा संबंध बनाती है। जब कोई व्यक्ति श्रद्धा से इसे गाता या सुनता है, तो उसके मन में शांति, प्रेम और भक्ति का भाव जागता है। यह आरती केवल गीत नहीं है, बल्कि भगवान से जुड़ने का एक साधन है।

लोग मानते हैं कि “Aarti Kunj Bihari Ki Lyrics” से घर का वातावरण पवित्र होता है और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। साथ ही, यह आरती गाने से मन में आनंद और विश्वास पैदा होता है।

कहा जाता है कि जो भी भक्त पूरे मन से यह आरती करता है, उसके जीवन में सुख, समृद्धि और संतोष आता है। इसलिए इसका महत्व केवल पूजा तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन को सकारात्मक बनाने का मार्ग भी दिखाती है।

Method to sing Aarti Kunj Bihari Lyrics at right time

“Aarti Kunj Bihari Ki Lyrics” आरती दिन में किसी भी समय गाई जा सकती है, लेकिन सबसे शुभ समय सुबह 7 बजे और शाम 7 बजे माना गया है। सुबह इसे गाने से पूरा दिन शुभ और ऊर्जा से भर जाता है, वहीं शाम को गाने से पूरे घर का वातावरण पवित्र हो जाता है।

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आरती गाने से पहले स्नान करना और साफ कपड़े पहनना अच्छा माना जाता है। पूजा की थाली में दीपक, धूपबत्ती, फूल और तुलसी की पत्तियाँ ज़रूर रखनी चाहिए। आरती शुरू करने से पहले भगवान श्री कृष्ण की मूर्ति या तस्वीर के सामने दीपक जलाएं और फिर पूरे मन से आरती गाना शुरू करें।

आरती के दौरान ध्यान भगवान श्री कृष्ण पर होना चाहिए। गाते समय ताली बजाना और घंटी बजाना वातावरण को और भी भक्तिमय बना देता है। अगर परिवार के लोग मिलकर आरती करें तो उसका प्रभाव और अधिक बढ़ जाता है। महत्वपूर्ण बात यह है कि आरती गाने में केवल शब्द ही नहीं, बल्कि भाव भी ज़रूरी हैं। श्रद्धा और विश्वास के साथ गाई गई आरती भगवान तक जल्दी पहुँचती है और भक्त के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाती है।

Real-Life experience of Devotees / भक्तों का वास्तविक जीवन का अनुभव

  1. सुधा शर्मा (दिल्ली)

सुधा जी बताती है की जब उन्होनें सुबह शाम रोज़ “Aarti Kunj Bihari Ki Lyrics” को गाना शुरू किया, तो उनके घर के रिश्तों में मधुरता आने लगी| पहले झा छोटी छोटी बातों पर झगडे हुआ करते थे, वहा अब शान्ति और समझदारी से काम लिया जाता हैं| 

  1. राहुल मेहता (जयपुर) 

राहुल कहते हैं की जब भी वे तनाव में होते हैं, तो श्री कृष्ण की इस आरती को सुन लेते हैं, इससे उनके मन का बोझ हल्का होजाता हैं, और उनका काम में मन लगने लगता हैं| 

  1. नेहल अग्रवाल (लखनऊ)

नेहल जी का अनुभव हैं की बच्चो की पढ़ाई और मनोबल पर इस आरती का बहुत अच्छा असर हुआ हैं| उनके अनुसार, आरती गाने के बाद बच्चों में ध्यान और अनुशासन बढ़ा| 

  1. अनिल तिवारी (वाराणसी) 

अनिल जी कहते हैं की वृंदावन की यात्रा के दौरान जब उन्होनें हज़ारों भक्तों के साथ मिलकर यह आरती गाई, तो उन्हें ऐसा लगा मानो भगवान श्री कृष्ण उनके सामने खड़े हैं| 

  1. दीपक गुप्ता (आगरा) 

दीपक बताते हैं की जब वें व्यापार एवं कठिनाइयों से जूझ रहे थे, तो उन्होंने हर दिन यह आरती गाना एवं सुनना शुरू करदिया, कुछ ही समय में उनका आत्मविश्वास लौटा और व्यापार में सुधार भी हुआ| 

  1. रीना वर्मा (इंदौर)

रीना जी कहती है की आरती गाते समय ऐसा लगता हैं की पूरा घर श्री कृष्ण की भक्ति से भर गया हो| इससे उन्हें मानसिक शान्ति और आत्मविश्वास मिलता हैं| 

  1. संजय मिश्रा (भोपाल) 

संजय जी के अनुसार, जब उन्होनें परिवार के साथ मिलकर रोज़ शाम को यह आरती गान शुरू किया, तो परिवार के सभी सदस्यों के बीच मत-भेद कम होने लगें| 

Conclusion / निष्कर्ष 

“Aarti Kunj Bihari Ki Lyrics” भगवान श्री कृष्ण की सबसे मोहक आरती में गिनी जाती है। यह सिर्फ एक भक्ति भरी आरती नहीं है, बल्कि श्रद्धा और विश्वास का ऐसा माध्यम है जो हर भक्त को श्री कृष्ण से जोड़ देता है। जब कोई इस आरती को गाता या सुनता है, तो उसके मन में भक्ति, शांति और प्रेम का भाव पैदा होता है।

कहा जाता है कि यह आरती गाने से घर का माहौल सकारात्मक बनता है और नकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाती है। कई भक्तों ने अनुभव किया है कि इसे नियमित रूप से गाने से परिवार में एकता बढ़ती है, रिश्तों में मिठास आती है और मन में आत्मविश्वास भी बढ़ता है।

यह आरती हर उम्र के लोगों के लिए आसान और प्रभावशाली है। छोटे बच्चों से लेकर बड़े-बुज़ुर्ग तक सभी इसे गाकर भक्ति का आनंद ले सकते हैं। यही कारण है कि इसे सिर्फ पूजा-पाठ का हिस्सा नहीं, बल्कि जीवन को संतुलित और सुखद बनाने वाला साधन माना जाता है। इसलिए, “Aarti Kunj Bihari Ki Lyrics” हर भक्त के जीवन में आध्यात्मिक ऊर्जा और सच्ची शांति लाने वाली आरती है।

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हमारे यहा अक्सर कहा जाता है की नज़र लग गई  है | क्या आपने कभी सोचा हैं आखिर ये होता क्या है, लोग क्यों बोलते है ऐसा? इसका मतलब होता है की किसी की बुरी नज़र या जलन भरी सोच से हमारे जीवन पर असर पड़ गया है| जब किसी को देखकर मन में इर्ष्या या नकारात्मक भावना आती है, तो वह ऊर्जा सामने वाले तक पोहच जाती है, उसे परेशान कर सकती है| इसका असर बच्चों के काम, व्यापार, या घर के वातावरण पर भी इसका प्रभाव पड़ता है|

इसी नज़र दोष से बचने के लिए लोग पुराने समय से घरेलु उपाय अपनाते आए है| उनमें से सबसे आसान और घरेलु उपाय हैं| नमक से नज़र उतारना, नमक को शुद्ध और पवित्र माना जाता है | यह सिर्फ खाने का स्वाद नही बढ़ता, बल्कि आसपास की नकारात्मकता ऊर्जा को भी खींच लेता है|

इसी वजह से लोग बच्चों, घर और व्यापार की नज़र उतारने में नमक का इस्तेमाल करते है| आगे इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे की नमक से नज़र क्यों और कैसे उतारी जाती है|

नज़र दोष और नमक का महत्व 

हमारे यहाँ नज़र दोष की मान्यता बहुत पुरानी है। अक्सर हम सुनते हैं – “बच्चे को नज़र लग गई” या “काम पर नज़र बैठ गई।” असल में नज़र दोष का मतलब है कि किसी की बुरी नज़र या जलन से हमारे जीवन पर असर पड़ रहा है। जब कोई हमें अच्छे मन से नहीं बल्कि ईर्ष्या या जलन से देखता है, तो उसकी नकारात्मक सोच हमारे आसपास के माहौल और हमारी ऊर्जा को बिगाड़ सकती है।

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इस कारण से कभी बच्चे अचानक बीमार पड़ जाते हैं, कभी काम रुकने लगते हैं और कभी घर में अजीब-सा भारीपन महसूस होने लगता है। ऐसे समय लोग घरेलू नुस्खों का सहारा लेते हैं और उनमें सबसे आसान और असरदार माना जाता है – नमक से नज़र उतारना।

नज़र दोष क्या है?

नज़र दोष तब लगता है जब कोई व्यक्ति हमें या हमारे काम को बुरी नज़र से देखता है। उसकी नज़र में जलन, ईर्ष्या या बुरा भाव होता है। यही नकारात्मक सोच हमारे जीवन को प्रभावित करती है। छोटे बच्चों पर इसका असर ज़्यादा होता है, क्योंकि उनका मन और शरीर बहुत कोमल होता है। अगर बच्चा अचानक चिड़चिड़ा हो जाए, दूध या खाना छोड़ दे, नींद पूरी न करे या बिना वजह बीमार पड़ जाए, तो लोग कहते हैं कि उसे नज़र लगी है।

बड़ों पर भी इसका असर दिखता है। कई बार अचानक से काम बिगड़ने लगते हैं, व्यापार में नुकसान होने लगता है या घर-परिवार में झगड़े शुरू हो जाते हैं। कभी-कभी बिना वजह थकान, चिड़चिड़ापन या बेचैनी महसूस होती है। ये सब नज़र दोष के ही लक्षण माने जाते हैं। यानी नज़र दोष हमारे स्वास्थ्य, मन की शांति और कामकाज – तीनों को बिगाड़ सकता है।

नमक का महत्व

नज़र दोष दूर करने के लिए पुराने समय से ही नमक का इस्तेमाल किया जाता है। नमक केवल खाने का स्वाद बढ़ाने वाली चीज़ नहीं है, बल्कि इसे शुद्ध और पवित्र माना गया है। माना जाता है कि नमक में नकारात्मक ऊर्जा को खींचने की ताकत होती है। यही कारण है कि दादी-नानी हमेशा कहती थीं – “नज़र लगी हो तो नमक से उतार दो।”

जब किसी की नज़र नमक से उतारी जाती है, तो वह बुरी ऊर्जा धीरे-धीरे कम हो जाती है और व्यक्ति या घर का माहौल हल्का और शांत महसूस होने लगता है। नमक से नज़र उतारना एक बहुत ही आसान तरीका है जिसमें किसी बड़े खर्च या पूजा की ज़रूरत नहीं होती।

ज्योतिष शास्त्र में भी नमक का खास महत्व बताया गया है। कहा जाता है कि नमक का संबंध शनि ग्रह से है और शनि नकारात्मक ऊर्जा को नियंत्रित करता है। इसी वजह से नमक का प्रयोग नज़र दोष दूर करने में असरदार माना जाता है। यही कारण है कि आज भी लोग नमक को नज़र हटाने का सबसे आसान और भरोसेमंद उपाय मानते हैं।

नमक से नज़र उतारने के आसान उपाय

बुरी नज़र उतारना सदियों से पारंपरिक प्रथाओं का हिस्सा रहा है, और नमक को सबसे प्रभावी और सरल उपायों में से एक माना जाता है। सबसे अच्छी बात यह है कि इन उपायों को करने के लिए आपको किसी जटिल अनुष्ठान या भारी खर्च की आवश्यकता नहीं है – ये घर पर ही थोड़े से नमक से किए जा सकते हैं। यहाँ कुछ आसान और विश्वसनीय तरीके दिए गए हैं :

1. मुट्ठी भर नमक का प्रयोग

अपनी हथेली में मुट्ठी भर सेंधा नमक या दरदरा नमक लें। इसे उस व्यक्ति के चारों ओर घुमाएँ जिसे बुरी नज़र लगी हो। इसे सिर से पैर तक, घड़ी की विपरीत दिशा में तीन या सात बार घुमाएँ। ऐसा करने के बाद, इस नमक को बहते पानी में बहा दें, या बहा दें। ऐसा माना जाता है कि नमक नकारात्मक ऊर्जा को अवशोषित कर लेता है और उसके साथ बह जाता है।

2. पानी के कटोरे में नमक

एक और आम तरीका है कि पानी से भरे कटोरे में थोड़ा नमक डालकर प्रभावित व्यक्ति के कमरे या कार्यस्थल पर रखें। इस कटोरे को ऐसे कोने में रखें जहाँ इसे कोई न हिलाए। हर कुछ दिनों में पानी और नमक बदलते रहें। कई लोगों का मानना है कि इससे वातावरण से बुरी ऊर्जा अवशोषित होती है और वातावरण सकारात्मक रहता है।

3. नहाने के पानी में नमक

नहाने के पानी में थोड़ा सा नमक मिलाना भी बुरी नज़र के प्रभाव से खुद को शुद्ध करने का एक शक्तिशाली तरीका माना जाता है। इस पानी से नहाने से न केवल शरीर तरोताज़ा होता है, बल्कि माना जाता है कि यह व्यक्ति के आभामंडल से जुड़ी नकारात्मक ऊर्जाओं को भी धो देता है।

4. बच्चों के लिए सेंधा नमक

कहा जाता है कि बच्चों को अक्सर बुरी नज़र जल्दी लग जाती है। ऐसे बच्चों के लिए, सेंधा नमक का एक छोटा टुकड़ा लें और उसे बच्चे के चारों ओर तीन या पाँच बार धीरे से घुमाएँ। इसके बाद नमक को फेंक दें। यह माताओं और दादी-नानी द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले सबसे पुराने और सबसे ज़्यादा इस्तेमाल किए जाने वाले उपायों में से एक है।

5. मुख्य द्वार के पास नमक

घर के प्रवेश द्वार के पास नमक से भरा एक छोटा कटोरा रखना एक और सरल लेकिन प्रभावी उपाय है। ऐसा माना जाता है कि यह नकारात्मक ऊर्जाओं को घर में प्रवेश करने से रोकता है और परिवार के सदस्यों को बुरी नज़र के अवांछित प्रभावों से बचाता है।

नमक से बने ये सरल उपाय पीढ़ियों से अपनाए जाते रहे हैं और आज भी कई घरों में इन पर भरोसा किया जाता है। माना जाता है कि नमक में नकारात्मकता को सोखने की प्राकृतिक शक्ति होती है, जिससे यह बुरी नज़र से बचने का एक त्वरित और आसान उपाय बन जाता है।एक पारंपरिक मान्यता मानते हैं, लेकिन कई लोग इन उपायों को अपनाने के बाद हल्का, शांत और अधिक सकारात्मक महसूस करते हैं।

बच्चों की नज़र उतारने में नमक की विधि

माना जाता है कि बच्चे बुरी नज़र के प्रभाव के प्रति सबसे ज़्यादा भावुक होते हैं। उनकी शुद्ध और मासूम ऊर्जा अक्सर ध्यान आकर्षित करती है, और कभी-कभी यह ध्यान ईर्ष्या या नकारात्मकता से भरा होता है। जब बच्चे अचानक बहुत रोने लगते हैं, खाना-पीना छोड़ देते हैं, या बिना किसी स्पष्ट कारण के बीमार पड़ जाते हैं, तो कई लोग मानते हैं कि यह बुरी नज़र के कारण हो सकता है। ऐसे में नमक एक आसान और सुरक्षित उपाय हो सकता है।

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1. सेंधा नमक घुमाएँ

सेंधा नमक का एक छोटा टुकड़ा या एक चुटकी दरदरा नमक हाथ में लें। इसे बच्चे के सिर से शुरू करके पैरों तक, घड़ी की विपरीत दिशा में तीन या सात बार धीरे से घुमाएँ। इसके बाद, नमक को बहते पानी में बहा दें या ऐसी जगह फेंक दें जहाँ कोई उस पर पैर न रखे। ऐसा माना जाता है कि इससे नकारात्मक ऊर्जा अवशोषित हो जाती है और बच्चे की रक्षा होती है।

2. नहाने के पानी में नमक

बच्चे के नहाने के पानी में थोड़ा सा नमक मिलाना एक और पारंपरिक तरीका है। ऐसा माना जाता है कि इस पानी से नहाने से अवांछित नकारात्मक ऊर्जाएँ दूर हो जाती हैं और बच्चा फिर से तरोताज़ा, शांत और खुश महसूस करता है।

3. बिस्तर के पास नमक रखें

कुछ माता-पिता बच्चे के बिस्तर या पालने के पास नमक से भरा एक छोटा कटोरा रखते हैं। ऐसा माना जाता है कि यह नमक एक ढाल की तरह काम करता है, जो आसपास की हानिकारक ऊर्जा को सोख लेता है और उसे सुकून भरी नींद देता है। इस नमक को हर कुछ दिनों में बदल देना चाहिए।

4. सरसों के साथ सेंधा नमक

कई घरों में, दादी-नानी सेंधा नमक और कुछ सरसों के दानों का मिश्रण भी इस्तेमाल करती हैं। वे इस मिश्रण को बच्चे के सिर के चारों ओर घुमाती हैं और फिर उसे जला देती हैं या फेंक देती हैं। यह बुरी नज़र के प्रभाव को दूर करने का एक बहुत ही कारगर उपाय माना जाता है।

ये उपाय सरल, सुरक्षित हैं और बच्चे को किसी भी तरह से नुकसान नहीं पहुँचाते हैं। कई परिवारों में इनका व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है और यह पीढ़ी दर पीढ़ी चला आ रहा है। नमक को एक प्राकृतिक रक्षक माना जाता है, और बच्चों के लिए इसका उपयोग बुरी नज़र हटाने के सबसे विश्वसनीय तरीकों में से एक है।

घर और व्यापार से नज़र हटाने के नमक का प्रयोग 

घर और व्यापार से नज़र उतारने के कई उपाय है लोगों की तरह, घर और कार्यस्थल भी बुरी नज़र से प्रभावित हो सकते हैं। जब कोई घर या व्यावसायिक स्थान भारी, नकारात्मक या अशुभ लगता है, तो कई लोग मानते हैं कि यह किसी की ईर्ष्या या नकारात्मक इरादों के कारण हो सकता है। इसके सामान्य लक्षणों में घर में बार-बार झगड़े, काम काज में आर्थिक नुकसान या बिना किसी कारण के अचानक टूट-फूट होना शामिल हैं। ऐसे समय में, नमक को नकारात्मक ऊर्जाओं को दूर भगाने का एक सरल लेकिन शक्तिशाली उपाय माना जाता है।

1. नमक के पानी से पोंछा

एक बहुत ही लोकप्रिय तरीका है एक बाल्टी पानी में एक चम्मच नमक डालकर उससे फर्श साफ़ करना। इस नमक के पानी से पोंछा लगाने से, ऐसा माना जाता है कि नकारात्मक ऊर्जा उस जगह से चली जाती है और घर में शांति बनी रहती है।

2. कोनों में नमक के कटोरे

घर या कार्यालय के अलग-अलग कोनों में सेंधा नमक से भरे छोटे कटोरे रखना एक और आम प्रथा है। नमक स्वाभाविक रूप से वातावरण से नकारात्मकता को सोख लेता है। कटोरे को हर हफ्ते बदलना चाहिए और इस्तेमाल किया हुआ नमक फेंक देना चाहिए।

3. नमक का दीपक या नमक के टुकड़े

कुछ लोग अपनी दुकान या कार्यालय में हिमालयन रॉक सॉल्ट लैंप या नमक के बड़े टुकड़े भी रखते हैं। ऐसा माना जाता है कि ये न केवल बुरी नज़र से बचाते हैं, बल्कि शांत और सकारात्मक वातावरण भी बनाते हैं।

4. व्यापार के लिए नमक अनुष्ठान

दुकानों या कार्यालयों में, सप्ताह में एक बार कैश काउंटर या मुख्य द्वार के चारों ओर मुट्ठी भर नमक घुमाने और फिर उसे बाहर फेंकने से व्यापार ईर्ष्या से सुरक्षित रहता है और सौभाग्य आता है।

इसी तरह नमक को हमेशा से एक प्राकृतिक शोधक माना जाता रहा है। इन सरल तरीकों से इसका उपयोग करने से घर में सद्भाव और व्यापार में स्थिरता बनी रहती है, और बुरी नज़र का प्रभाव दूर रहता है।

नमक से नज़र उतारते समय ध्यान देने योग्य बातें

नमक से नज़र उतारते समय हालाँकि नमक बुरी नज़र उतारने का एक सरल और आसानी से उपलब्ध उपाय है, लेकिन इसका इस्तेमाल थोड़ी सावधानी से करना ज़रूरी है। बहुत से लोग इन उपायों का पूरी आस्था के साथ पालन करते हैं, लेकिन अगर कुछ छोटी-छोटी बातों पर ध्यान न दिया जाए, तो इसका असर उतना ज़्यादा नहीं होता।

1. नमक का दोबारा इस्तेमाल न करें

एक बार बुरी नज़र उतारने के लिए नमक का इस्तेमाल करने के बाद, उसका दोबारा इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। उदाहरण के लिए, अगर आप इसे किसी व्यक्ति के ऊपर घुमाते हैं या घर के कोनों में कटोरों में रखते हैं, तो इस्तेमाल के बाद उसी नमक को फेंक देना चाहिए। इसे हमेशा घर के बाहर फेंकें, कूड़ेदान में नहीं।

2. सर्वोत्तम परिणामों के लिए सेंधा नमक का प्रयोग करें

हालाँकि सामान्य खाना पकाने वाला नमक भी काम करता है, लेकिन सेंधा नमक (सेंधा नमक या बड़े क्रिस्टल (स्फटिक)) को अक्सर पसंद किया जाता है क्योंकि माना जाता है कि यह नकारात्मकता को तेज़ी से और ज़्यादा प्रभावी ढंग से सोख लेता है।

3. गीले हाथों से छूने से बचें

अनुष्ठान करते समय, गीले या तैलीय हाथों से नमक को छूने से बचें। कई लोगों का मानना है कि इससे नकारात्मकता सोखने की उसकी क्षमता कम हो जाती है। इसका इस्तेमाल करते समय हमेशा अपने हाथ सूखे रखें।

4. एक नियमित दिन तय करें

निरंतरता बनाए रखने के लिए, इस अनुष्ठान को करने के लिए हर हफ़्ते एक खास दिन, जैसे शनिवार या मंगलवार, चुनें। ऐसा कहा जाता है कि यह नियमित अभ्यास नकारात्मक ऊर्जाओं को लंबे समय तक दूर रखता है।

5. विश्वास और सकारात्मकता बनाए रखें

सबसे ज़रूरी बात, इस उपाय को विश्वास और शांत मन से करें। नमक तो बस एक माध्यम है – यह सकारात्मक विचारों, प्रार्थनाओं और विश्वास के साथ मिलकर सबसे अच्छा काम करता है।

इन सरल बातों को ध्यान में रखने से नमक के उपाय ज़्यादा प्रभावी हो जाते हैं। यह एक प्राकृतिक शोधक है, और सही तरीके से इस्तेमाल करने पर यह आपके घर, परिवार और व्यवसाय को बुरी नज़र के हानिकारक प्रभावों से बचाने में मदद कर सकता है।

ज्योतिषी के आधार पर नमक का बुरी नज़र से ज्योतिषीय संबंध

ज्योतिष में, नमक को केवल रसोई की वस्तु ही नहीं, बल्कि एक शक्तिशाली प्राकृतिक शोधक भी माना जाता है। प्राचीन काल से ही, ज्योतिषी ऊर्जा संतुलन और नकारात्मकता से रक्षा के लिए नमक के उपयोग का सुझाव देते रहे हैं। वैदिक मान्यताओं के अनुसार, नमक में नकारात्मक तरंगों को अवशोषित करने की क्षमता होती है, इसलिए यह बुरी नज़र से बचाव के उपायों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

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ग्रहों से संबंध

ज्योतिषीय दृष्टि से, नमक को अक्सर शनि और कभी-कभी चंद्रमा से जोड़ा जाता है। ये दोनों ग्रह हमारी भावनाओं, मानसिक शांति और पारिवारिक सद्भाव को प्रभावित करते हैं। जब ये ऊर्जाएँ विचलित होती हैं, तो लोग नज़र दोष (बुरी नज़र) के प्रति अधिक संवेदनशील महसूस कर सकते हैं। माना जाता है कि नमक के उपचार इन ग्रहों के प्रभावों को शांत करते हैं और स्थिरता लाते हैं।

शोधक के रूप में नमक

कई परंपराओं में, नमक को आभामंडल का प्राकृतिक शोधक माना जाता है। जिस प्रकार यह भोजन से कड़वाहट दूर करता है, उसी प्रकार यह जीवन से कड़वाहट और नकारात्मकता को दूर करता है। इसीलिए ज्योतिषी अक्सर घर के वातावरण को सकारात्मक बनाए रखने के लिए कमरों में सेंधा नमक की छोटी कटोरी रखने या फर्श साफ करने के लिए नमक को पानी में डालकर इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं।

व्यावहारिक ज्योतिषीय उपाय

कुछ ज्योतिषी नींद में सुधार और बुरे सपनों से बचाव के लिए बिस्तर के पास सेंधा नमक का एक छोटा टुकड़ा रखने का सुझाव देते हैं। कुछ अन्य ज्योतिषी शरीर की ऊर्जा को शुद्ध करने के लिए सप्ताह में एक बार नमक के पानी से स्नान करने की सलाह देते हैं। व्यवसायों को भी दूसरों की ईर्ष्या और बुरी नीयत को दूर रखने के लिए एक कोने में नमक के क्रिस्टल (स्फटिक) रखने की सलाह दी जाती है।

ज्योतिष हमें सिखाता है कि नमक केवल स्वाद के लिए ही नहीं, बल्कि ऊर्जा संतुलन के लिए भी उपयोगी है। विश्वास के साथ इसका प्रयोग करने पर, यह हमें बुरी नज़र के हानिकारक प्रभावों से बचा सकता है और हमारे आस-पास शांति का वातावरण बना सकता है।

निष्कर्ष 

बुरी नज़र या नज़र, एक ऐसी चीज़ है जिस पर विभिन्न संस्कृतियों के लोग विश्वास करते हैं। ऐसा माना जाता है कि जब कोई हमें ईर्ष्या या नकारात्मक नीयत से देखता है, तो यह हमारे स्वास्थ्य, खुशी या यहाँ तक कि सफलता को भी प्रभावित कर सकता है।

कई घरेलू उपायों में से, नमक का उपयोग हमेशा से बुरी नज़र के प्रभाव को दूर करने का सबसे सरल और विश्वसनीय तरीका रहा है।

ऐसा माना जाता है कि नमक नकारात्मक ऊर्जा को सोख लेता है और हमारे आस-पास के वातावरण में सकारात्मकता लाता है। चाहे किसी व्यक्ति के चारों ओर नमक लहराना हो, नमक के पानी से घर की सफाई करना हो, या कमरे के किसी कोने में सेंधा नमक रखना हो, ये छोटे-छोटे उपाय मन की शांति ला सकते हैं।

यह सिर्फ़ एक विश्वास ही नहीं, बल्कि प्रियजनों के प्रति देखभाल और सुरक्षा दिखाने का एक तरीका भी है। जब हम इन उपायों को पूरे विश्वास के साथ करते हैं, तो हम मज़बूत और सुरक्षित महसूस करते हैं।

तो, अगली बार जब आप उदास, बेचैन महसूस करें, या आपको लगे कि नज़र आपको प्रभावित कर रही है, तो नमक के इन आसान उपायों को आज़माएँ। ये हानिरहित, सरल और परंपराओं में गहराई से निहित हैं।

भगवान श्री राम को मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है| वे सत्य, धर्म और आदर्श जीवन के प्रतीक हैं| जब भी हम भगवान राम का नाम लेते हैं, मन में श्रद्धा और शांति का भाव अपने आप आ जाता हैं|  उनकी भक्ति करने के कई तरीके हैं, लेकिन Nitin Mukesh Shree Ram Stuti Lyrics गाना और सुनना एक बहुत ख़ास अनुभव देता है| 

नितिन मुकेश भारतीय संगीत जगत के प्रसिद्ध गायक हैं| उन्होनें अपनी मधुर आवाज़ से श्री राम स्तुति को और भी सुन्दर बना दिया हैं| इस स्तुति को सुनते समय एसा लगता है जैसे भगवान राम हमारे दिल में बस गए हैं| बच्चे हो या बड़े, हर कोई इस स्तुति को आसानी से समझ सकता है और इसके भावों को महसूस कर सकता हैं| 

Nitin Mukesh Shree Ram Stuti Lyrics सिर्फ गीत नहीं हैं, बल्कि यह जीवन के मूल्यों को भी याद दिलाता है| जब हम इसे गाते हैं तो हमारा मन सकारात्मक होता है, तनाव दूर होता है और भक्ति भाव गहरा हो जाता हैं|

नितिन मुकेश कौन है?

नितिन मुकेश भारत के एक प्रसिद्ध गायक हैं| वे अपने भजनों और मीठी आवाज़ के लिए जाने जाते हैं| उनका जन्म एक संगीत परिवार में हुआ था| उनके पिता मुकेश भी बॉलीवुड के बहुत बड़े गायक थे| मुकेश जी की आवाज़ आज भी लोगों के दिल में बसती है| नितिन मुकेश ने अपने पिता की गायकी से बहुत कुछ सीखा और आगे चलकर खुद भी एक सफल गायक बने| 

इसी तरह नितिन मुकेश ने फिल्मों में भी गाने गाए हैं| लेकिन लोग उन्हें सबसे ज़्यादा भक्ति गीतों और भजनों के लिए पहचानते हैं| उनकी गाई हुई श्री राम की स्तुति, कृष्ण भजन, हनुमान चालीसा और कई अन्य भजन भक्तों को बहुत पसंद आते हैं| उनकी आवाज़ में भक्ति सुनकर मन शांत हो जाता है और भगवान के प्रति श्रद्धा बढ़ती है| 

वे सिर्फ गायक ही नहीं, बल्कि एक बहुत ही सरल और विनम्र इंसान भी माने जाते हैं| उन्होनें हमेशा भारतीय संस्कृति और संगीत को आगे बढ़ाया है| आज भी उनके भजन मंदिरों, घरों और धार्मिक कार्यक्रमों में गाय और सुने जाते हैं| 

नितिन मुकेश की सबसे बड़ी खासियत है की वे हर गीत को दिल से गाते है| उनकी आवाज़ में सच्चाई और भक्ति झलकती है| इसी वजह से लोग उन्हें बहुत मानते और सुनते हैं| 

Nitin Mukesh Shree Ram Stuti Lyrics Hindi (हिंदी)

|| दोहा ||

|| श्री रामचन्द्र कृपालु भज
मन हरण भाव भय दारुणं,
नव कंज लोचन कंज
मुख कर कंज पद कंजारुणं || 1

||कन्दर्प अगणित अमित छवि
नव नील नीरद सुन्दरं,
पटपीत मानहूँ तडित रूचि शुचि
नोमि जनक सुतावरं || 2 

|| भजु दीनबन्धु दिनेश दानव
देत्य वंश निकन्दनं,
रघुनंद आनंद कंद कौशल
चन्द दशरथ नन्दनं || 3  

|| शिर मुकुट कुंडल तिलक
चारु उदारु अङ्ग विभूषणं,
आजानु भुज शर चाप धर
संग्राम जित खरदूषणं || 4 

|| इति वदति तुलसीदास शंकर
शेष मुनि मन रंजनं,
मम हृदयं कंज निवास कुरु
कामादि खलदल गंजनं || 5 

|| मन जाहि राच्यो मिलही सो
वर सहज सुन्दर सावरों,
करुणा निधान सुजान शील
स्नेह जानत रावरो || 6 

|| एही भांति गौरी असीस सुन सिय
सहित हिय हरषित अली,
तुलसी भवानिहि पूजी पुनि-पुनि
मुदित मन मंदिर चली || 7 

|| सोरठा || 

|| जानी गौरी अनुकूल सिय
हिय हरषु ण जाई कहि,
मंजुल मंगल मूल वाम
अङ्ग फरकने लगे ||

Nitin Mukesh Shree Ram Stuti Lyrics1

Nitin Mukesh Shree Ram Stuti Lyrics  English (अंग्रेजी)

||DOHA||

|| SHREE RAMCHANDRA KRIPALU BHAJ
MAN HARAN BHAAV BHAY DARUNAM,
NAV KANJ LOCHAN KANJ
MUKH KAR KANJ PAD KANJAARUNAM || 1 

|| KANDARP AGANIT AMIT CHAVI
NAV NEEL NEERAD SUNDARAM,
PATPEET MAANHOO TADIT RUCHI SUCHI
NOMI JANAK SUTAVARAM || 2 

|| BHAJU DEENBANDHU DINESH DAANAV
DETYA VANSH NIKANDNAM,
RAGHUNAND AANAND KAND KAUSHAL
CHAND DASHRATH NANDNAM || 3

|| SHIR MUKUT KUNDAL TILAK
CHARU UDAARU ADANG VIBHUSHANAM,
AAJANU BHUJ SHAR CHAAP DHAR
SANGRAM JIT KHARDUSHNAM || 4

 || ITI VADTI TULSIDAS SHANKAR
SHESH MUNI MAN RANJNAM
MAM HRIDYAM KANJ NIWAS KURU
KAMAADI KHALDAL GANJNAM || 5

|| MAN JAAHI RAACHYO MILHI SAU
VAR SEHAJ SUNDAR SAAVRON,
KARUNA NIDHAAN SUJAAN SHEEL
SNEH JAANAT RAAVRON || 6

|| EHI BHAANTI GAURI ASEES SUN SIY
SAHIT HIY HARSHIT ALI,
TULSI BHAVANIHI POOJI PUNI-PUNI
MUDIT MAN MANDIR CHALI || 7

|| SAURTHA ||

|| JAANI GAURI ANUKUL SIY
HIY HARSHU N JAAI KAHI,
MANJUL MANGAL MOOL VAAM
ADANG FARAKNE LAGE ||

नितिन मुकेश श्री राम स्तुति लिरिक्स का महत्व 

नितिन मुकेश श्री राम स्तुति लिरिक्स बहुत ख़ास है| यह सिर्फ एक गाना नहीं, बल्कि भगवान श्री राम के गुणों की स्तुति है याद है| जब हम इसे सुनते या गाते हैं, तो हमारे दिल को शांति मिलती है और दिमाग हल्का महसूस करता है|

भगवान श्री राम को मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है| इसका मतलब है की उन्होनें हमेशा सही रास्ता चुना और सच का साथ दिया| इस स्तुति को गाने से हमें भि सीख मिलती है की हमें सच्च्चाई, धैर्य और हिम्मत के साथ जीवन जीना चाहिए| 

नितिन मुकेश की मीठी आवाज़ इस भजन को और भी प्यारा बना देती है| उनकी गायकी सुनकर हर कोई भक्ति में डूब जाता है| यही वजह है की यह भजन छोटे-बड़े सभी लोगों को भगवान राम के करीब ले जाता है|

धार्मिक मान्यता है कि श्री राम का नाम लेने से गुनाह मिटते हैं, और जीवन में नयी ताकत और उम्मीद आती है| घर में जब यह स्तुति गाई या सुनी जाती है, तो पूरा माहौल साफ़ और सकारात्मक बन जाता है| संक्षेप में, नितिन मुकेश श्री राम स्तुति लिरिक्स हमें भगवान श्री राम से जोड़ता है, हमारे मन को साफ़ करता है और जीवन में सुख शांती लाता हैं|

नितिन मुकेश श्री राम स्तुति लिरिक्स को गाने या सुनने का सही समय और विधि

नितिन मुकेश श्री राम स्तुति लिरिक्स गाने या सुनने का कोई भी समय अच्छा है, लेकिन कुछ खास समय ज़्यादा शुभ माने जाते हैं।

  • सुबह का समय – सुबह स्नान करके, साफ कपड़े पहनकर इस स्तुति को गाना या सुनना बहुत शुभ होता है। इससे दिन अच्छा बीतता है और मन शांत रहता है।
  • शाम का समय – संध्या यानी शाम को दीपक जलाकर भगवान श्री राम के सामने यह स्तुति गाने से घर का माहौल सकारात्मक हो जाता है।
  • पूजा या त्यौहार के दिन – राम नवमी, दीपावली, नवरात्रि या किसी भी पूजा के दिन यह भजन गाना बेहद अच्छा माना जाता है।

श्री राम स्तुति लिरिक्स गाने/सुनने की सही विधि

  1. सबसे पहले स्नान करें और साफ जगह पर बैठें।
  2. भगवान श्री राम की मूर्ति या तस्वीर के सामने दीपक और अगरबत्ती जलाएँ।
  3. श्रद्धा और भक्ति भाव से इस स्तुति को गाएँ या सुनें।
  4. अगर समय कम हो तो कम से कम सुबह या शाम इसे सुनना बहुत अच्छा होता है।
  5. गाने के बाद भगवान राम को प्रणाम करें और शांति से बैठकर ध्यान करें।

इस तरह नितिन मुकेश श्री राम स्तुति लिरिक्स को गाने या सुनने से मन को शांति मिलती है, घर में सुख-समृद्धि आती है और भगवान श्री राम का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

नितिन मुकेश श्री राम स्तुति लिरिक्स के लाभ 

नितिन मुकेश श्री राम स्तुति लिरिक्स को गाने या सुनने से बहुत सारे फायदे होते हैं। यह सिर्फ एक भजन नहीं है, बल्कि भगवान श्रीराम से जुड़ने का तरीका है।

मुख्य लाभ:

  1. मन की शांति – इस स्तुति को सुनने से मन शांत होता है और टेंशन कम होती है।
  2. घर में सुख-शांति – जब घर में यह भजन गाया या बजाया जाता है, तो माहौल अच्छा और सकारात्मक हो जाता है।
  3. भय दूर होता है – भगवान राम का नाम लेने से डर और चिंता कम होती है।
  4. हिम्मत और धैर्य मिलता है – यह भजन सुनकर इंसान को हिम्मत और सहनशक्ति मिलती है।
  5. भक्ति बढ़ती है – श्रीराम की स्तुति करने से भगवान के प्रति प्रेम और विश्वास और गहरा होता है।
  6. परिवार में एकता – साथ बैठकर इसे गाने या सुनने से परिवार के बीच प्यार और जुड़ाव बढ़ता है।
  7. आत्मविश्वास बढ़ता है – भजन से मिलने वाली सकारात्मक ऊर्जा इंसान को आत्मविश्वासी बनाती है।

नितिन मुकेश श्री राम स्तुति लिरिक्स हर भक्त के जीवन में शांति, हिम्मत, और खुशियाँ लाता है। यह भजन हमें भगवान श्री राम की शरण में ले जाता है और उनके आशीर्वाद से जीवन सरल और सुखी बनता है।

निष्कर्ष 

नितिन मुकेश श्री राम स्तुति लिरिक्स केवल एक भजन नहीं है, बल्कि श्री राम की महिमा और उनके आदर्श जीवन का सुन्दर वर्णन है| जब कोई भक्त इस स्तुति को गाता या सुनता है, तो उसका मन तुरंत भगवान राम से जुड़ जाता हैं| नितिन मुकेश की मीठी और भावपूर्ण आवाज़ इस स्तुति को और भी ख़ास बना देती हैं|

श्री राम मर्यादा पुरुषोत्तम हैं, उनकी स्तुति करने से हमें सच्चाई, धैर्य और साहस जैसे गुण अपनाने की प्रेरणा मिलती हैं| इस भजन को याद गाने या सुनने से न केवल मन शांत होता हैं, बल्कि घर में भि सुख-शांति और सकारात्मकता का वातावरण बनता है|

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान राम का नाम लेने से पाप मिटते हैं, और इंसान को नई शक्ति और आत्मविश्वास मिलता हैं| यही कारण है की यह स्तुति हर उम्र के लोगों के लिए उपयोगी और प्रिय हैं| 

नितिन मुकेश श्री राम स्तुति लिरिक्स एक एसा भक्ति गीत है जो हर भक्त को भगवान राम के करीब ले जाता है, और जीवन में सुख शांति और आशा भर देता हैं|

Aigiri Nandini lyrics in Hindi

अयिगिरि नन्दिनि (Aigiri Nandini Lyrics in Hindi) दुर्गा देवी का एक बहुत लोकप्रिय भक्ति स्तोत्र है।  इसे महिषासुर मर्दिनी स्तोत्रम या महिषासुर मर्दिनी श्लोक कहा जाता है। यह भक्ति गीत देवी महिषासुर मर्दिनी को संबोधित है, देवी जिन्होंने राक्षस महिषासुर का वध किया था।

अयिगिरि नन्दिनि (Aigiri Nandini Lyrics in Hindi) गुरु आदि शंकराचार्य (श्री श्री श्री शंकर भगवत्पादाचार्य) द्वारा लिखित देवी दुर्गा का एक बहुत लोकप्रिय भक्ति स्तोत्र है। यह भक्ति छंद देवी महिषासुर मर्दिनी को संबोधित है, देवी जिन्होंने राक्षस महिषासुर का वध किया था।

महिषासुर मर्दिनी देवी दुर्गा माँ (देवी पार्वती का अवतार) का उग्र रूप है, जहाँ दुर्गा माँ को 10 भुजाओं के साथ दर्शाया गया है जो शेर या बाघ की सवारी करती हैं और हथियार रखती हैं और प्रतीकात्मक हाथ के इशारे या मुद्राएँ बनाती हैं। 

देवी दुर्गा क्रोध, भय, अहंकार और क्रोध पर विजय प्राप्त करने वाली हैं। जो लोग इन सभी से जूझ रहे हैं, वे खुद को देवी के सामने समर्पित कर सकते हैं।

आज इस ब्लॉग के साथ हम अयिगिरि नन्दिनि स्तोत्र के लिरिक्स (Aigiri Nandini Lyrics in Hindi) जानेंगे। इसके साथ आप किसी प्रकार की पूजा के लिए पंडित बुक करने के लिए जुड़ें 99Pandit के साथ या ‘Book a Pandit’ पर क्लिक करके पंडित बुक करें।

अयिगिरि नन्दिनि लिरिक्स हिंदी में / Aigiri Nandini Lyrics in Hindi 

अयिगिरि नन्दिनि नन्दितमेदिनि विश्वविनोदिनि नन्दिनुते
गिरिवरविन्ध्यशिरोधिनिवासिनि विष्णुविलासिनि जिष्णुनुते
भगवति हे शितिकण्ठकुटुम्बिनि भूरिकुटुम्बिनि भूरिकृते
जय जय हे महिषासुर मर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १ ॥ 

सुरवरवर्षिणि दुर्धरधर्षिणि दुर्मुखमर्षिणि हर्षरते
त्रिभुवनपोषिणि शङ्करतोषिणि किल्बिषमोषिणि घोषरते
दनुजनिरोषिणि दितिसुतरोषिणि दुर्मदशोषिणि सिन्धुसुते
जय जय हे महिषासुर मर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ २ ॥

अयि जगदम्ब मदम्ब कदम्बवनप्रियवासिनि हासरते
शिखरिशिरोमणितुङ्गहिमालयशृङ्गनिजालयमध्यगते
मधुमधुरे मधुकैटभगञ्जिनि कैटभभञ्जिनि रासरते
जय जय हे महिषासुर मर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ३ ॥

अयि शतखण्ड विखण्डितरुण्ड वितुण्डितशुण्ड गजाधिपते
रिपुगजगण्ड विदारणचण्ड पराक्रमशुण्ड मृगाधिपते
निजभुजदण्ड निपातितखण्डविपातितमुण्डभटाधिपते
जय जय हे महिषासुर मर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ४ ॥

अयि रणदुर्मद शत्रुवधोदित दुर्धरनिर्जर शक्तिभृते
चतुरविचारधुरीण महाशिव दूतकृत प्रमथाधिपते
दुरितदुरीहदुराशयदुर्मतिदानवदूतकृतान्तमते
जय जय हे महिषासुर मर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ५ ॥

अयि शरणागतवैरिवधूवर वीरवराभयदायकरे
त्रिभुवन मस्तक शूलविरोधिशिरोधिकृतामल शूलकरे
दुमिदुमितामर दुन्दुभिनाद महो मुखरीकृत तिग्मकरे
जय जय हे महिषासुर मर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ६ ॥

अयि निजहुङ्कृतिमात्र निराकृत धूम्रविलोचन धूम्रशते
समरविशोषित शोणितबीज समुद्भवशोणित बीजलते
शिव शिव शुम्भ निशुम्भ महाहव तर्पित भूत पिशाचरते
जय जय हे महिषासुर मर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ७ ॥

धनुरनुसङ्ग रणक्षणसङ्ग परिस्फुरदङ्ग नटत्कटके
कनक पिशङ्गपृषत्कनिषङ्गरसद्भट शृङ्ग हतावटुके
कृतचतुरङ्ग बलक्षितिरङ्ग घटद्बहुरङ्ग रटद्बटुके
जय जय हे महिषासुर मर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ८ ॥

सुरललना ततथेयि तथेयि कृताभिनयोदर नृत्यरते
कृत कुकुथः कुकुथो गडदादिकताल कुतूहल गानरते
धुधुकुट धुक्कुट धिन्धिमित ध्वनि धीर मृदङ्ग निनादरते
जय जय हे महिषासुर मर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ९ ॥

जय जय जप्य जये जय शब्दपरस्तुति तत्पर विश्वनुते
भण भण भिञ्जिमि भिङ्कृतनूपुर सिञ्जितमोहित भूतपते
नटितनटार्ध नटीनटनायक नाटितनाट्य सुगानरते
जय जय हे महिषासुर मर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १० ॥

अयि सुमनः सुमनः सुमनः सुमनः सुमनोहर कान्तियुते
श्रित रजनी रजनी रजनी रजनी रजनीकर वक्त्रवृते
सुनयन विभ्रमर भ्रमर भ्रमर भ्रमर भ्रमराधिपते
जय जय हे महिषासुर मर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ११ ॥

सहित महाहव मल्लम तल्लिक मल्लित रल्लक मल्लरते
विरचित वल्लिक पल्लिक मल्लिक भिल्लिक भिल्लिक वर्ग वृते
सितकृत पुल्लिसमुल्लसितारुण तल्लज पल्लव सल्ललिते
जय जय हे महिषासुर मर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १२ ॥

अविरलगण्डगलन्मदमेदुर मत्तमतङ्गज राजपते
त्रिभुवनभूषणभूतकलानिधि रूपपयोनिधि राजसुते
अयि सुदतीजन लालसमानस मोहनमन्मथ राजसुते
जय जय हे महिषासुर मर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १३ ॥

कमलदलामल कोमलकान्ति कलाकलितामल भाललते
सकलविलास कलानिलयक्रम केलिचलत्कल हंसकुले
अलिकुल सङ्कुल कुवलय मण्डल मौलिमिलद्भकुलालि कुले
जय जय हे महिषासुर मर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १४ ॥

करमुरलीरववीजितकूजित लज्जितकोकिल मञ्जुमते
मिलित पुलिन्द मनोहर गुञ्जित रञ्जितशैल निकुञ्जगते
निजगुणभूत महाशबरीगण सद्गुणसम्भृत केलितले
जय जय हे महिषासुर मर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १५ ॥

कटितटपीत दुकूलविचित्र मयूखतिरस्कृत चन्द्ररुचे
प्रणतसुरासुर मौलिमणिस्फुरदंशुलसन्नख चन्द्ररुचे
जितकनकाचल मौलिपदोर्जित निर्भरकुञ्जर कुम्भकुचे
जय जय हे महिषासुर मर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १६ ॥

विजित सहस्रकरैक सहस्रकरैक सहस्रकरैकनुते
कृत सुरतारक सङ्गरतारक सङ्गरतारक सूनुसुते
सुरथसमाधि समानसमाधि समाधिसमाधि सुजातरते
जय जय हे महिषासुर मर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १७ ॥

पदकमलं करुणानिलये वरिवस्यति योऽनुदिनं स शिवे
अयि कमले कमलानिलये कमलानिलयः स कथं न भवेत्
तव पदमेव परम्पदमित्यनुशीलयतो मम किं न शिवे
जय जय हे महिषासुर मर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १८ ॥

कनकलसत्कल सिन्धुजलैरनु सिञ्चिनुतेगुण रङ्गभुवं
भजति स किं न शचीकुचकुम्भ तटीपरिरम्भ सुखानुभवम्
तव चरणं शरणं करवाणि नतामरवाणि निवासि शिवं
जय जय हे महिषासुर मर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १९ ॥

तव विमलेन्दुकुलं वदनेन्दुमलं सकलं ननु कूलयते
किमु पुरुहूत पुरीन्दुमुखी सुमुखीभिरसौ विमुखीक्रियते
मम तु मतं शिवनामधने भवती कृपया किमुत क्रियते
जय जय हे महिषासुर मर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ २० ॥

अयि मयि दीनदयालुतया कृपयैव त्वया भवितव्यमुमे
अयि जगतो जननी कृपयासि यथासि तथाऽनुभितासिरते
यदुचितमत्र भवत्युररि कुरुतादुरुतापमपाकुरुते
जय जय हे महिषासुर मर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ २१ ॥

इति श्री महिषासुर मर्दिनि स्तोत्रम् ||

अयिगिरि नन्दिनि लिरिक्स अंग्रेजी में / Aigiri Nandini Lyrics in English 

Ayigiri Nandini Nanditamedini Vishvavinodini Nandinute
Girivaravindhyashiro’dhinivasini Vishnuvilasini Jishnunute।
Bhagavati He Shitikanthakutumbini Bhurikutumbini Bhurikrite
Jaya Jaya He Mahishasuramardini Ramyakapardini Shailasute॥1॥

Suravaravarshini Durdharadharshini Durmukhamarshini Harsharate
Tribhuvanaposhini Shankaratoshini Kilbishamoshini Ghosharate
Danujaniroshini Ditisutaroshini Durmadashoshini Sindhusute
Jaya Jaya He Mahishasuramardini Ramyakapardini Shailasute॥2॥

Ayi Jagadamba Madamba Kadamba Vanapriyavasini Hasarate
Shikhari Shiromani Tungahimalaya Shringanijalaya Madhyagate।
Madhumadhure Madhukaitabhaganjini Kaitabhabhanjini Rasarate
Jaya Jaya He Mahishasuramardini Ramyakapardini Shailasute॥3॥

Ayi Shatakhanda Vikhanditarunda Vitunditashunda Gajadhipate
Ripugajaganda Vidaranachanda Parakramashunda Nrigadhipate।
Nijabhujadanda Nipatitakhanda Vipatitamunda Bhatadhipate
Jaya Jaya He Mahishasuramardini Ramyakapardini Shailasute॥4॥

Ayi Ranadurmada Shatruvadhodita Durdharanirjara Shaktibhrite
Chaturavichara Dhurinamahashiva Dutakrita Pramathadhipate।
Duritaduriha Durashayadurmati Danavaduta Kritantamate
Jaya Jaya He Mahishasuramardini Ramyakapardini Shailasute॥5॥

Ayi Sharanagata Vairivadhuvara Viravarabhaya Dayakare
Tribhuvanamastaka Shulavirodhi Shiro’dhikritamala Shulakare।
Dumidumitamara Dhundubhinadamahomukharikrita Dinmakare
Jaya Jaya He Mahishasuramardini Ramyakapardini Shailasute॥6॥

Ayi Nijahunkriti Matranirakrita Dhumravilochana Dhumrashate
Samaravishoshita Shonitabija Samudbhavashonita Bijalate।
Shivashivashumbha Nishumbhamahahava Tarpitabhuta Pishacharate
Jaya Jaya He Mahishasuramardini Ramyakapardini Shailasute॥7॥

Dhanuranushanga Ranakshanasanga Parisphuradanga Natatkatake
Kanakapishanga Prishatkanishanga Rasadbhatashringa Hatabatuke।
Kritachaturanga Balakshitiranga Ghatadbahuranga Ratadbatuke
Jaya Jaya He Mahishasuramardini Ramyakapardini Shailasute॥8॥

Suralalana Tatatheyi Tatheyi Kritabhinayodara Nrityarate
Krita Kukuthah Kukutho Gadadadikatala Kutuhala Ganarate।
Dhudhukuta Dhukkuta Dhindhimita Dhvani Dhira Nridanga Ninadarate
Jaya Jaya He Mahishasuramardini Ramyakapardini Shailasute॥9॥

Jaya Jaya Japya Jayejayashabda Parastuti Tatparavishvanute
Jhanajhanajhinjhimi Jhinkrita Nupurashinjitamohita Bhutapate।
Natita Natardha Nati Nata Nayaka Natitanatya Suganarate
Jaya Jaya He Mahishasuramardini Ramyakapardini Shailasute॥10॥

Ayi Sumanahsumanahsumanah Sumanahsumanoharakantiyute
Shritarajani Rajanirajani Rajanirajani Karavaktravrite।
Sunayanavibhramara Bhramarabhramara Bhramarabhramaradhipate
Jaya Jaya He Mahishasuramardini Ramyakapardini Shailasute॥11॥

Sahitamahahava Mallamatallika Mallitarallaka Mallarate
Virachitavallika Pallikamallika Jhillikabhillika Vargav
Shitakritaphulla Samullasitaruna Tallajapallava Sallalite
Jaya Jaya He Mahishasuramardini Ramyakapardini Shailasute॥12॥

Aviralaganda Galanmadamedura Mattamatanga Jarajapate
Tribhuvanabhushana Bhutakalanidhi Rupapayonidhi Rajasute।
Ayi Sudatijana Lalasamanasa Mohana Manmatharajasute
Jaya Jaya He Mahishasuramardini Ramyakapardini Shailasute॥13॥

Kamaladalamala Komalakanti Kalakalitamala Bhalalate
Sakalavilasa Kalanilayakrama Kelichalatkala Hansakule।
Alikulasankula Kuvalayamandala Maulimiladbakulalikule
Jaya Jaya He Mahishasuramardini Ramyakapardini Shailasute॥14॥

Karamuralirava Vijitakujita Lajjitakokila Manjumate
Militapulinda Manoharagunjita Ranjitashaila Nikunjagate।
Nijaganabhuta Mahashabarigana Sadgunasambhrita Kelitale
Jaya Jaya He Mahishasuramardini Ramyakapardini Shailasute॥15॥

Katitatapita Dukulavichitra Mayukhatiraskrita Chandraruche
Pranatasurasura Maulimanisphura Danshulasannakha Chandraruche
Jitakanakachala Maulimadorjita Nirbharakunjara Kumbhakuche
Jaya Jaya He Mahishasuramardini Ramyakapardini Shailasute॥16॥

Vijitasahasrakaraika Sahasrakaraika Sahasrakaraikanute
Kritasurataraka Sangarataraka Sangarataraka Sunusute।
Surathasamadhi Samanasamadhi Samadhisamadhi Sujatarate।
Jaya Jaya He Mahishasuramardini Ramyakapardini Shailasute॥17॥

Padakamalam Karunanilaye Varivasyati Yo’nudinam Sushive
Ayi Kamale Kamalanilaye Kamalanilayah Sa Katham Na Bhavet।
Tava Padameva Parampadamityanushilayato Mama Kim Na Shive
Jaya Jaya He Mahishasuramardini Ramyakapardini Shailasute॥18॥

Kanakalasatkalasindhujalairanushinchati Tegunarangabhuvam
Bhajati Sa Kim Na Shachikuchakumbhatatiparirambhasukhanubhavam।
Tava Charanam Sharanam Karavani Natamaravani Nivasi Shivam
Jaya Jaya He Mahishasuramardini Ramyakapardini Shailasute॥19॥

Tava Vimalendukulam Vadanendumalam Sakalam Nanu Kulayate
Kimu Puruhutapurindu Mukhi Sumukhibhirasau Vimukhikriyate।
Mama Tu Matam Shivanamadhane Bhavati Kripaya Kimuta Kriyate
Jaya Jaya He Mahishasuramardini Ramyakapardini Shailasute॥20॥

Ayi Mayi Dina Dayalutaya Kripayaiva Tvaya Bhavitavyamume
Ayi Jagato Janani Kripayasi Yathasi Tathanumitasirate।
Yaduchitamatra Bhavatyurarikurutadurutapamapakurute
Jaya Jaya He Mahishasuramardini Ramyakapardini Shailasute॥21॥

अयिगिरि नन्दिनि महिषासुर मर्दिनी स्तोत्र का महत्व /  Importance of Ayigiri Nandini Mahishasura Mardini Stotra 

अयिगिरि नन्दिनि स्तोत्र की महिमा भक्तजन में बहुत ही महत्वपूर्ण है। स्तोत्र का पाठ करने मात्रा से ही भय से मुक्ति मिलती है। माँ दुर्गा एक आदि शक्ति हैं जो किसी भी आत्मा के अंदर के सभी भय पर विजय प्राप्त करती हैं, जो क्रोध, द्वेष, क्रोध और अहंकार को मारती हैं और मन, शरीर और आत्मा में रहने वाली सभी नकारात्मकता को दूर भगाती हैं। 

महिषासुर मर्दिनी स्तोत्र का पाठ करने से माँ दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त होता है। माँ दुर्गा का आशीर्वाद पाने के लिए व्यक्ति को पूरी तरह से उनके प्रति समर्पित होना चाहिए, तभी वह अपने तरीके से भक्त को शुद्ध कर पाएंगी। 

किसी भी लड़ाई में जीतने या किसी भी डर या चुनौती पर विजय पाने के लिए माँ दुर्गा की शक्तियों को प्राप्त करने के लिए, नियमित रूप से बहुत भक्ति के साथ  महिषासुर मर्दिनी (अयिगिरि नन्दिनि) का पाठ करना एक आशीर्वाद है। देवी माँ आपको युद्ध जीतने में मदद करेंगी और आपके सभी कार्यों में विजय दिलाएँगी। अयिगिरि नन्दिनि का पाठ करने से आपके जीवन से सभी दुख दूर हो जाएँगे। 

अयिगिरि नन्दिनि महिषासुर मर्दिनी स्तोत्रम का पाठ करने के लाभ Benefits of reciting Ayigiri Nandini Mahishasura Mardini Stotram

  1. यह स्तोत्रम बहुत शक्तिशाली है और एक प्रार्थना के रूप में है जो माँ दुर्गा को समर्पित है। इस स्तोत्रम का जाप करने से भक्तों को माता दुर्गा की असीम कृपा मिल सकती है और सभी बुराइयों और दुश्मनों से सुरक्षा मिल सकती है।
  2. जो लोग इस स्तोत्रम को बड़ी श्रद्धा के साथ पढ़ते हैं, देवी दुर्गा उन्हें मोक्ष प्राप्त करने में मदद करती हैं।
  3. इस स्तोत्रम का पाठ करने से लोग सभी प्रकार के दुखों और पीड़ाओं से बाहर निकल सकते हैं।
  4. यह स्तोत्रम जीवन से सभी बाधाओं और रुकावटों को दूर करने में मदद करता है।
  5. जो लोग स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित हैं, वे स्वास्थ्य संबंधी बीमारियों से छुटकारा पा सकते हैं।
  6. जो लोग हमेशा चिंता, अवसाद और मानसिक तनाव से ग्रस्त रहते हैं, उन्हें यह स्तोत्रम इससे उबरने और उन्हें खुश करने में मदद करता है, लेकिन उन्हें इस स्तोत्रम का प्रतिदिन पाठ करने की सलाह दी जाती है।
  7. जिन भक्तों को वित्तीय समस्याएं हैं, वे इस स्तोत्रम का पाठ करना शुरू करें और देवी दुर्गा धन और पैसे से संबंधित सभी समस्याओं को दूर करेंगी।
  8. जब आप इस स्तोत्रम का पूरी श्रद्धा के साथ पाठ करते हैं तो आपका मन शांत और सकारात्मक हो जाता है।
  9. एक इंसान क्रोध, भय, क्रोध, पछतावा, चिंताओं से भरा होता है और इस शक्तिशाली महिषासुर मर्दिनी स्तोत्रम का पाठ करने से भक्त इन सभी बुरे गुणों को दूर करने में सक्षम होते हैं और एक अच्छा इंसान बन सकते हैं।
  10. जो लोग जीवन में काले जादू की समस्या का सामना कर रहे हैं, उन्हें इससे छुटकारा पाने के लिए इस स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। 

अयिगिरि नन्दिनि स्तोत्रम का पाठ कैसे करें? How to recite Ayigiri Nandini Stotram? 

  1. सुबह जल्दी उठें और स्नान करें। 
  2. एक लकड़ी का पटरा रखें और एक साफ कपड़ा बिछाएं और फिर दुर्गा माता की मूर्ति रखें। 
  3. फूल या माला चढ़ाएं और देसी घी का दीया जलाएं।
  4. भोग प्रसाद (हलवा चना और पूरी) चढ़ाएं 
  5. कुशा का आसन लगाएं और अगर आपके पास नहीं है तो कंबल बिछा लें. 
  6. इस स्तोत्र का पाठ एकाग्रता, समर्पण के साथ शुरू करें और मां दुर्गा के प्रति अपार श्रद्धा रखें।

निष्कर्ष 

यह अयिगिरि नन्दिनि महिषासुर मर्दिनी दिव्य मंत्र देवी दुर्गा को समर्पित है, जो शक्ति, साहस और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है।इस स्तोत्र का जाप माँ दुर्गा देवी का आह्वान करने के लिए किया जाता है।

नवरात्रि के दौरान अयिगिरि नन्दिनि महिषासुर मर्दिनी स्तोत्र का बहुत महत्व है। महान ऋषि आदि शंकराचार्य द्वारा 810 ई. के आसपास रचित यह स्तोत्र देवी महात्म्य पर आधारित है और देवी की विभिन्न शक्तियों का गुणगान करता है। 

देवी दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती के विभिन्न रूप धारण करती हैं और राक्षसों – मधु और कैटभ, महिषासुर, और शुम्भ और निशुम्भ का नाश करती हैं। अयिगिरि नन्दिनि महिषासुर मर्दिनी स्तोत्रम भक्त को शांति प्रदान करता है और सभी भय और दुखों को दूर करता है। यह संदेह, क्रोध, अहंकार और जड़ता जैसी नकारात्मक भावनाओं को दूर करता है। यह स्तोत्र भक्त के मार्ग से आने वाली बाधाओं को भी दूर करता है।

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ज़िन्दगी में हर इंसान को कभी न कभी मुश्किलें आती हैं| कभी मेहनत करने के बाद सफलता देर से मिलती हैं, कभी घर में सुख-शान्ति की कमी महसूस होती हैं और कभी रिश्ते ठीक से नहीं चल पातें| ऐसे वक़्त पर हर कोई उपाय ढूंढता है, जो सरल हो, ज्यादा खर्चा ना हो और जिसे आम इंसान भी प्रयोग कर सकें| 

लाल किताब के सिद्ध 25 टोटके और उपाय (Lal Kitab Ke Totke Aur Upay) इसलिए इतने लोकप्रिय हैं| इनमें दिए गए उपाय ज्यादा कठिन नहीं होते, और इन्हें कोई भी व्यक्ति घर पर आसानी से कर सकता हैं| कहा जाता हैं की यह टोटके ना सिर्फ़ समस्याओं को कम करते हैं, बल्कि जीवन में सकारात्मक ऊर्जा भी भर देते हैं|

इन लाल किताब के सिद्ध 25 टोटके और उपाय को अपनाकर हर इंसान अपने करियर में उन्नति पा सकता हैं, घर में ख़ुशहाली ला सकता हैं और अपने व्यक्तिगत जीवन को बेहतर बना सकता हैं| यह उपाय आम ज़िन्दगी से जुड़े होते हैं, इसलिए इन्हें हर कोई अपने जीवन में अपना सकता है, और इनका प्रयोग कर सकता हैं| 

लाल किताब के सिद्ध 25 टोटके और उपाय

1. सूर्य शांति टोटका / Surya Shanti Totka
सूर्य देव / सूरज देवता को रोज़ाना पानी अर्पित कीजिये, इससे आपकी ऊर्जा और आत्मविश्वास बढ़ता है और जीवन में सकारात्मकता आती हैं|


2. हनुमान बल टोटका / Hanuman Bal Totka
हर मंगलवार को हनुमान जी को लाल कपड़े और सिन्दूर चढ़ाएं, यह टोटका आपके संकट और मुसीबतों को दूर करता हैं| 


3. घर सुख टोटका / Ghar Sukh Totka
घर के दरवाजें और कमरों के सभी कोने साफ़ रखें, इससे घर में नकारात्मक ऊर्जा नहीं आती और शान्ति बनी रहती हैं|


4. शिव शान्ति टोटका / Shiv Shanti Totka
सोमवार को दूध/पंचामृत से शिवलिंग का अभिषेक करो, इससे दिमाग शांत होता है और तनाव से राहत मिलती है, साथ ही आध्यात्मिक शक्ति बढ़ती हैं|


5. दिया प्रकाश टोटका / Diya Prakash Totka
अपने कमरें में हमेशा एक दिया जलाकर रखिये, इससे सकारात्मकता बढ़ती है और नकारात्मक सोच का अंत होता हैं| 


6. बचपन आनंद टोटका / Bachpan Anand Totka
हर शुक्रवार छोटी कन्याओं को खाना खिलाओं, इससे घर में खुशियाँ और जीवन में सद्भाव आता हैं|


7. लाल रंग टोटका / Laal Rang Totka
लाल रंग का कपड़ा या रुमाल हमेशा अपने साथ रखिये, इससे आपके कामों में सफलता आती रहेगी, करियर की परेशानियां भी कम होती रहेंगी| 


8. गौ सेवा टोटका / Gau Seva Totka
हर मंगलवार को रोटी पर गुड़ रखके गौ माता को खिलाएं, इससे पाप कम होते है और गौ माता का आशीर्वाद मिलता हैं| 


9. दान टोटका / Daan Totka
सफ़ेद कपड़ों का दान करें, इससे घर में लड़ाई-झगड़े कम होते हैं और जीवन में शान्ति का आगमन होता हैं|


10. बुद्धि तेज़ टोटका / Buddhi Tez Totka
हर बुधवार हरे कपड़े पहना करो और मंदिर में भी दान करो, इससे बुद्धि तेज़ होती है पढ़ाई और व्यवसाय में सफलता मिलती हैं|


11. शनि शांति टोटका / Shani Shanti Totka
शनिवार को काले कुत्ते को रोटी या खाना खिलायें, इससे परेशानियां, जीवन की कठिनाइयाँ कम होती हैं और शनिदेव की कृपा प्राप्त होती हैं| 


12. रवि धन टोटका / Ravi Dhan Totka
हर रविवार गुड़ और गेहूं का दान करिए, इससे पैसा और ऐश्वर्य आता है और आर्थिक तंगी भी खतम होती हैं| 


13. तुलसी शान्ति टोटका / Tulsi Shanti Totka
घरके मंदिर या आँगन में तुलसी का पौधा रखियें, परिवार में सद्भाव, सकारात्मकता और एकता बनी रहती हैं| 


14. चांदी धन टोटका / Chandi Dhan Totka
हर शुक्रवार चांदी का एक सिक्का या कटोरी मंदिर में रखियें, आर्थिक विकास और बचत करने में आसानी होती हैं|


15. कमाई टोटका / Kamaai Totka
हर मंगलवार एक लाल धागा अपने हाथ में बांधियें(लड़के अपने दाएं हाथ में और लडकियां अपने बायें हाथ में) इससे आपके करियर / व्यवसाय को प्रोत्साहन मिलता हैं| 


16. सुख टोटका / Sukh Totka
घर के कोने में Peace Lily नाम का पौधा रखें उसको ध्यान रखें पानी देते रहे, इससे जीवन में सुख और शान्ति आती हैं| 


17. विज्ञान टोटका / Vigyaan Totka
बुधवार को नीम के पत्ते या तुलसी के पत्ते मंदिर में रखें, इससे ज्ञान और बुद्धि तेज़ होती हैं, फैसला लेने में आसानी होती हैं|  


18. संकट मोचन टोटका / Sankat Mochan Totka
हनुमान जी की तस्वीर के सामने लाल फूल और सिन्दूर चढ़ाएं, इससे जीवन की मुश्किलें और कठिनाइयाँ खत्म होती हैं| 


19. धन वृद्धि टोटका / Dhan Vriddhi Totka
रविवार को लाल दाल का दान करें, पैसा और दौलत बढ़ने लगती हैं|


20. शांति टोटका / Shanti Totka
सोमवार के दिन सुबह और शाम एक दिया जलाकर मंदिर में रखें, दिमाग और तन शांत होते है और स्वास्थ बेहतर रहता हैं|


21. व्यापार टोटका / Vyaapar Totka
बुधवार को अपने व्यवसाय या ऑफिस काउंटर में तुलसी रखें, इससे ग्राहक/क्लाइंट और व्यापार क्षेत्र में वृद्धि मज़बूत होती हैं|


22. रिश्तों का टोटका / Rishton Ka Totka
शुक्रवार को किसी ज़रूरतमंद को खाना खिलाए या उनकी मदद करें, इससे घर के सदस्यों से रिश्ते बेहतर होते हैं|


23. विघ्न निवारण टोटका / Vighna Nivaaran Totka
शुक्रवार को काले कपड़े दान करें, जीवन की परेशानियां खत्म होती हैं और दुश्मनों का सफाया होता हैं|


24. स्वास्थ टोटका / Swaasth Totka
घर में साफ़ सफाई रखें, रसोई को रोज़ाना साफ़ करें और स्वस्थ भोजन खाए इससे स्वास्थ तंदरुस्त रहता हैं|


25. सफ़लता टोटका / Safalta Totka
सोमवार को लाल फूल जेसे गुड़हल और गुलाब का दान करें मंदिर में चढ़ाएं, करियर, पढ़ाई और व्यक्तिगत लक्ष्य प्राप्त करने में आसानी होती हैं|

निष्कर्ष 

लाल किताब के सिद्ध 25 टोटके और उपाय एक पुराना और प्रचलित उपाय है जिसे लोग अपने जीवन से कठिनाइयाँ दूर करने के लिए अपनाते हैं। ये उपाय ज्योतिष और धार्मिक परंपरा से जुड़े हैं, जो ग्रह दोषों को शांत करने, कष्टों को कम करने और सुख-शांति प्राप्त करने के तरीके बताते हैं।

लेकिन याद रखें कि हर व्यक्ति की जन्म कुंडली, ग्रह स्थिति और समस्या अलग-अलग होती है। इसलिए एक ही उपाय सभी के लिए एक जैसा परिणाम नहीं देता। इन्हें समझे बिना, कभी-कभी व्यक्ति के कर्म हानिकारक भी हो सकते हैं।

इसलिए पहले किसी अनुभवी पंडित से सलाह लेना आवश्यक है। अगर आप इन उपायों का प्रयोग करते हैं, तो धार्मिक मर्यादा और नियमों का पालन करते हुए करें। सच्ची सफलता और खुशी के लिए, अपने कर्मों में निरंतर सुधार करते रहें, कड़ी मेहनत करते रहें और सकारात्मक सोचें।

उपाय तभी प्रभावी होते हैं जब व्यक्ति अपने आचरण और विचारों को शुद्ध रखता है। धैर्य, विश्वास और सही रास्ते पर चलना जीवन के लिए सबसे उत्तम उपाय हैं।

ध्यान – इस ब्लॉग में दिए गए सभी लाल किताब के सिद्ध 25 टोटके और उपाय | Lal Kitab Ke Totke Aur Upay केवल जानकारी के लिए हैं| 99Panditji इन टोटको या उपायों का समर्थन नहीं करता हैं|

अगर आप इन्हें अपनाने का विचार कर रहे है, तो किसी वैदिक अनुभवी पण्डित की देख-रेख में करें| आपकी सुरक्षा, धार्मिक मर्यादा और मार्गदर्शन हमारे लिए सबसे ज़रूरी हैं|

Shri-Ganesh-Aur-Budhiya-Mai-Ki-Kahani

बचपन से ही हमने सुना है कि भगवान तक पहुंचने का रास्ता दिल से गुज़रता है। ना शानदार भोग की जरुरत होती है, ना बड़ी-बड़ी पूजा की, बस एक सच्चा मन और भक्ति का साफ भाव चाहिए। श्री गणेश और बुढ़िया माई की कथा इसी बात को बहुत प्यारे तरीके से समझती है।

कहानी एक छोटी सी गांव की बुढ़िया से शुरू होती है, जो अपने जीवन में गरीब थी, लेकिन उसका दिल भक्ति से भरा था। उसके पास धन-दौलत तो नहीं था, पर एक पवित्र मन था जो गणेश जी को समर्पित था। भगवान गणेश अपने भक्तों के मन की गहराईयों को समझते हैं, इसलिए वो उनके लिए कुछ भी छोटा-बड़ा नहीं मानते।

ये लोककथा हमें सिखाती है कि भक्ति का असली मतलब सिर्फ पूजा-पाठ नहीं, बल्की अपने मन, समर्पण और प्रेम को भगवान तक पहुंचाना है। आज भी लोग कहानी को श्रद्धा से सुनते हैं, क्योंकि ये हमें याद दिलाती है कि सच्चे प्रेम और सदेव भक्ति से ही भगवान को प्रसन्न किया जा सकता है।

श्री गणेश एवं बुढ़िया माई की कथा

1. पवित्र मन की भक्ति और आशीर्वाद 

एक छोटे से गाँव में एक बुढ़िया माई रहती थी। उसके पास न धन-दौलत थी, न बड़ी संपत्ति थी, लेकिन उसका दिल भक्ति से भरा हुआ था। हर दिन वो अपने हाथों से मिट्टी की छोटी सी श्री गणेश जी की मूर्ति बनाती है, उनकी पूजा करती है। मिट्टी की मूर्ति होने के कारण वो कुछ ही देर में पिघल जाती थी, लेकिन बुढ़िया की श्रद्धा कभी कम नहीं होती थी।

एक दिन बुढ़िया बाज़ार में कुछ सामान लेने जा रही थी जहां कुछ मजदूर एक नए मकान का निर्माण कर रहे थे। उसने प्यार से उसे कहा, “बेटा, थोड़े से पत्थर से मेरे लिए गणेश जी की मूर्ति बना दो, ताकि मैं उनकी पूजा कर सकूं।”

मजदूरों ने मज़ाक उड़ाते हुए बोला , – “मां, हम पहले घर बनाएंगे, उसे बाद में देखते हैं।”

shri ganesh ji

बुढ़िया ने हल्का सा हँस कर कहा – “अच्छा बेटा, पर ध्यान रखना… कही तुम्हारी दीवार टेढ़ी ना हो जाये।”

मजदूरों ने बात को मजाक में ले लिया, लेकिन कुछ दिन बाद सच में दीवार टेढ़ी बनने लगी। मजदूरों ने बहुत प्रयास किया की दीवार सीधी बने पर वो कैसे न कैसे करके टेढ़ी हो ही जाती थी|

जब घर का मालिक शहर से वापस आया, तो ये देख कर हैरान रह गया। उसने मजदूरों से पूछा, की ये दीवार टेढ़ी क्यों बन रही है? फिर उन्होनें बुढ़िया के साथ हुआ वार्ता बताई |

मालिक तुरंत बुढ़िया के पास गया और विनम्रता से बोला, “माई, हम आपके लिए पत्थर से भी अच्छे गणेश जी की मूर्ति बनवा देंगे। बस आप आशीर्वाद दे दीजिए कि हमारी दीवार सीधी बन जाए।” बुढ़िया माई ने शांत मुस्कान के साथ हाथ उठाया और आशीर्वाद दिया। अगले ही दिन से दीवार सीधी बनने लगी।

ये कहानी ये सिखाती है कि सच्चे दिल की भक्ति और पवित्र मन का आशीर्वाद हर काम को सफल बना सकता है। भक्ति में धन से ज्यादा मन की शुद्धता मायने रखती है।

2. समझदारी का वरदान 

एक छोटे से गाँव में एक अंधी और गरीब बुढ़िया रहती थी। उसके घर में एक बेटा और बहू थी। जिंदगी में सुविधा कम थी, लेकिन बुढ़िया का मन भक्ति से भरा हुआ था। हर सुबह-शाम वो पूरी श्रद्धा से गणेश जी की पूजा करती थी।

एक दिन, उसकी निष्काम भक्ति से प्रभाव होकर गणेश जी उसके सामने प्रकट हुए और बोले, “मां, तू रोज बिना किसी लालच के मेरी पूजा करती है। मुझसे जो चाहे वर मांग ले।” 

बुढ़िया माई ने विनम्रता से कहा, “प्रभु, माँगना मुझे आता ही नहीं।” गणेश जी मुस्कुरा कर बोले, “तो ठीक है, कल तक सोच ले। अपने बेटा-बहू से पूछ ले।” अगले दिन बुढ़िया माई ने बेटा से पूछा, तो बेटा बोला,“मां, धन मांग लो।” बहू ने कहा, “मां, एक पूता मांग लो।”

बुढ़िया माइ को लगा दोनो अपने-अपने फायदे की बात कर रहे हैं। तब उसने पड़ोसन से सलाह ली पड़ोसन बोली, “तेरी थोड़ी जिंदगी बची है, तू आंख और जोड़ी मांग ले, ताकि बचा हुआ जीवन आराम से गुज़ारे।” बुढ़िया ने सोचा – ऐसा वर मांगू जो सबके लिए शुभ हो।

जब गणेश जी फिर आये, बुढ़िया बोली, “प्रभु, मुझे अन्न, धन, अच्छी सेहत, आंख-जोड़ी, सोने का कटोरा जिसके पूते को दूध पिलाते देखो, परिवार का सुख, और आपके चरणों में सदैव स्थान प्राप्त हो।” गणेश जी हंस कर बोले, “मां, तूने तो सब कुछ समझदारी से मांग लिया।

जो तू चाहती है, सब तुझे मिलेगा।” इतना कहकर गणेश जी अपना आशीर्वाद देकर अंतर्ध्यान हो गए|

श्री गणेश एवं बुढ़िया माई की कथा का महत्व 

(पहली कथा के माध्यम से) श्री गणेश और बुढ़िया माई की कथा हमें एक बहुत गहरी बात समझती है – भगवान को खुश करने के लिए शानदार भोग, मेहेंगी मूर्ति या बड़े समारोह की ज़रूरत नहीं होती। भगवान के लिए सबसे ज्यादा रखता है भक्त का पवित्र मन, उसका प्रेम और उसका समर्पण।

बुढ़िया माई गरीब थी, लेकिन उसके पास एक अमूल्य दौलत थी – भक्ति। मिट्टी की मूर्ति जल्दी पिघला जाती थी, पर उसका प्रेम कभी पिघला नहीं। ये हमें सिखाता है कि भक्ति का मोल समान या सुविधा से नहीं, बाल्की दिल के भाव से होता है।

इस कहानी का दूसरा पहलू ये है कि सच्चे दिल से बोली गई बात में भी एक अलग शक्ति होती है। बुढ़िया माई ने जो कहा, उसका असर सच में दीवार पर हुआ। इसका मतलब है कि पवित्र मन से निकलने वाले शब्द, चाहे वो आशीर्वाद हो या दुआ, वो अपनी एक अलग ताकत रखते हैं।

आज के समय में जब हम जिंदगी की भाग-दौड़ में भक्ति को भी एक “औपचारिक अनुष्ठान” बना देते हैं, ये कहानी हमें याद दिलाती है कि असली पूजा दिल से होती है। और जब दिल से पूजा होती है तो छोटे से छोटा भोग भी भगवान को प्रसन्न कर देता है।

श्री गणेश जी की आराधना में भक्ति और सादगी का भाव

(पहली कथा के माध्यम से) श्री गणेश जी की पूजा का सबसे बड़ा सुंदर पहलू ये है कि उनकी आराधना में ज़्यादा श्रृंगार, शान-शौकत या महँगाई का दिखावा ज़रूरी नहीं होता। गणेश जी को प्रसन्न करने के लिए बस एक पवित्र मन, सच्चा प्रेम और भक्ति भरा दिल चाहिए।

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कहानी में जो बुढ़िया थी, उसके पास ना सोना-चांदी था, ना किसी पूजा की व्यवस्था। वह तो बस चिकनी मिट्टी की छोटी सी मूर्ति बनाकर पूजा करती थी, लेकिन उसका प्रेम और बिना लालच की भक्ति गणेश जी तक सीधा पहुंच गयी थी। 

ये दिखाता है कि भगवान के लिए भाव का मोल होता है, ना कि सामग्री का। सदैव देखा गया है कि जब भक्ति में शुद्धती होती है, तो उसमें एक अलग पवित्रता आ जाती है। शब्द, गीत, या पूजा के विधि से ज्यादा, भक्त के दिल का भाव मायने रखता है।

गणेश जी को एक मोदक, एक पात्र, या एक दीपक भी तब प्यारा लगता है जब वो शुद्ध प्रेम बिना किसी लोभ लालच के माध्यम से जलाया जाए। इसलिए हमारी पूजा में शुद्ध मन और इमानदारी का होना ही सबसे बड़ा अलंकार है।

इस कहानी के माध्यम से ये संदेश मिलता है कि साध्गी और सच्ची भक्ति ही भगवान तक पहुंचने का सीधा रास्ता है चाहे हमारे पास धन हो या ना हो।

बुढ़िया माई की श्रद्धा और निःस्वार्थ सेवा का संदेश

बुढ़िया माई की कहानी हमें एक अनमोल सीख देती है कि भक्ति सिर्फ मांगने का नाम नहीं, बल्कि निस्वार्थ मन से देने का भी नाम है।

वो गरीब थी, अंधी थी, लेकिन उसने कभी अपनी पूजा में कमी नहीं होने दी। उसके पास जो थोड़ा सा समय था, मन का प्रेम और मिट्टी की मूर्ति बनाने की शक्ति थी, वो सब उसने गणेश जी के चरणों में समर्पित कर दिया। 

सबसे खास बात ये थी कि वो अपनी आराधना में किसी बदले की इच्छा नहीं रखती थी। ना धन का लालच, ना सुख-समृद्धि की चिंता – बस एक भोला सा मन जो सिर्फ भगवान को खुश देखना चाहता था। इसे कहते हैं निष्काम भक्ति।

उसके प्रेम को देख कर गणेश जी स्वयं प्रकट हुए, जो ये साबित करता है कि जब सेवा और भक्ति स्वार्थ से परे होती है, तो भगवान स्वयं भक्त के दर पर आ जाते हैं।

आज के समय में जब हम पूजा में ज्यादा दिखावा करते हैं, ये कहानी हमें याद दिलाती है कि असली शक्ति दिल की शुद्धा में है। जो भक्ति सच्ची, प्रेम और सेवा से भरी हो, वही भगवान तक पहुँची है।

गणेश जी की पूजा में मन की पवित्रता का महत्व

गणेश जी की पूजा का असली सार सिर्फ मंत्र, फूल, प्रसाद या आरती में नहीं, बाल्की हमारे मन की पवित्रता में छिपा है। भगवान को हम कितना देते हैं, ये मायने नहीं रखते – उनके लिए ये ज़्यादा ज़रूरी है कि हम जो देते हैं वो शुद्ध मन और सच्चाई से दिया हो। बुढ़िया माई के पास ना सोना था, ना चांदी के बर्तन, ना बड़ी व्यवस्था।

वो तो मिट्टी की छोटी सी मूर्ति बनकर भक्ति भाव से गणेश जी को अर्पण करती थी। मिट्टी की मूर्ति बार-बार पिघल जाती थी, लेकिन उसका प्रेम कभी कम नहीं हुआ। ये बताता है कि भगवान के लिए मूर्ति का आकार या बांध नहीं, भक्त के दिल का भाव मायने रखता है।

शुद्ध मन का मतलब होता है दूसरे के लिए बुरा ना सोचना, अपने दिल में सद्भाव, प्रेम और इमानदारी रखना। जब हम गणेश जी की आरती या मंत्र उच्चारण करते हैं, तो सिर्फ ज़बान नहीं, दिल भी उन शब्दों को महसूस करे।

गणेश जी को “विघ्नहर्ता” इसलिए कहा जाता है क्योंकि वो अपने भक्तों के रास्ते से बाधाएं दूर कर देते हैं। लेकिन ये तभी संभव है जब हम अपने मन से भी उन सब बुरी सच, अहंकार, और लालच को दूर करें।

इस कहानी से ये स्पष्ट होता है कि भगवान के पास पहुंचने का सीधा रास्ता है एक पवित्र, निष्काम, और प्रेम से भरा हुआ मन। जितना हम अपने दिल को साफ रखते हैं, उतने ही गणेश जी हम पर अपनी कृपा बरसाते हैं।

आज भी क्यों याद की जाती है यह प्रेरणादायक कथा

श्री गणेश जी और बुढ़िया माई की दोनों कहानियाँ एक ही बात समझती हैं – भगवान के लिए भक्ति का माप धन, शक्ति या शान-शौकत से नहीं होता, बल्कि दिल की पवित्रता से होता है।

पहली कहानी में बुढ़िया माई मिट्टी की मूर्ति बनती थी, जो बार-बार पिघल जाती थी। उसने एक मजदूर से पत्थर की मूर्ति बनाने को कहा, लेकिन उसने मन कर दिया। बुढ़िया माई ने हंसी-में उसके घर की दीवार टेढ़ी होने का आशीर्वाद दे दिया और वही हुआ।

जब मलिक ने उसे वापस सीधा करने को कहा, तो बुढ़िया माई ने माफ करके आशीष दे दिया| ये दिखाता है कि भक्ति के साथ दया और माफ़ कर देने का गुण भी ज़रूरी है।

दूसरी कहानी में बुढ़िया माई गरीब थी, अंधी और अकेली थी, लेकिन उसका मन भक्ति से भरा था। उसने कभी कुछ माँगने का लालच नहीं रखा। जब गणेश जी स्वयं आए तो बुढ़िया माई ने अपने परिवार का, अपने सुख का और अपने भविष्य का ख्याल रखते हुए एक साथ सब मांग लिया बिना किसी स्वार्थ के, बस प्रेम और पवित्रता के साथ।

दोनों कहानियां मिलकर हमें ये सिखाती हैं कि चाहे हमारे पास कुछ भी हो या ना हो, सच्ची भक्ति, निष्काम सेवा, और मन की सफाई ही भगवान तक पहुंचने का सीधा रास्ता है। आज भी ये कहानियाँ याद की जाती हैं क्योंकि ये हमें याद दिलाती हैं कि भगवान हमारे भाव को समझते हैं, भोग को नहीं।

निष्कर्ष 

श्री गणेश जी और बुढ़िया माई की कहानियाँ हमें एक बहुत गहरी सीख देती हैं भक्ति का असली रूप शुद्ध मन, प्रेम, और निष्काम भावना में होता है। चाहे हमारे पास धन हो या ना हो, बड़ी व्यवस्था हो या सिर्फ मिट्टी की एक छोटी मूर्ति, अगर हम पूरे प्रेम और श्रद्धा से भगवान की आराधना करते हैं तो वो हमारी पूजा को जरूर स्वीकार करते हैं।

बुढ़िया माई ने अपनी पूजा में कभी दिखाया नहीं किया, ना किसी से कुछ मांगा, बस अपने भगवान को पूरे दिल से याद किया। इसी तरह, उसने अपनी दया, विनम्रता और माफ़ कर देने का गुण भी दिखाया। ये कहानी हमें बताती है कि भगवान को पाने का रास्ता साफ-सुथरा नहीं, बल्कि अंदर की सफाई से होती है।

आज के युग में जब लोग भक्ति में भी शान-शौकत और दिखावा ढूंढने लगते हैं, ये कहानी एक याद-दिलानी है कि गणेश जी जैसे देवता हमारे दिल के भाव को पहचानते हैं। अगर मन पवित्र है, भावना सच्ची है, तो भगवान स्वयं हमारे जीवन में आशीर्वाद बरसाते हैं।

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“Aarti Jai Ganesh Deva Lyrics” भगवान गणेश जी की सबसे प्रसिद्ध और प्यारी आरती है। यह आरती लगभग हर घर और मंदिर में गाई जाती है। जब भी कोई शुभ काम, पूजा, या त्योहार शुरू होता है, सबसे पहले गणपति बप्पा का याद किया जाता है, क्योंकि उन्हें विघ्नहर्ता और सिद्धिदाता कहा जाता है। मतलब जो भी कठिनाई हो, उसे दूर करने वाले और भक्तों को सफलता देने वाले।

इस आरती में बार-बार “जय गणेश देवा” कहा गया है, जो भक्त की श्रद्धा और भक्ति को दिखाता है। इस आरती को गाते समय हर कोई अपने मन से बप्पा को प्रणाम करता है और उनसे आशीर्वाद माँगता है। चाहे बच्चा हो या बड़ा, इस आरती को सुनकर सबके चेहरे पर शांति और खुशी आ जाती है।

गणेश जी के कई नाम हैं – गजानन, विघ्नहर्ता, बप्पा, मंगलमूर्ति  और “जय गणेश देवा” आरती में इन सब रूपों को सम्मान दिया गया है। इस ब्लॉग में हम पढ़ेंगे “Aarti Jai Ganesh Deva Lyrics” हिंदी और अंग्रेजी में, इसका महत्व, लाभ और किसने इसे गाया है।

इस आरती में जय गणेश देवा क्यों कहा हैं?

भगवान गणेश को “जय गणेश देवा” कहकर क्यों पुकारा जाता है, इसका कारण उनकी विशेषता और महत्व है। गणपति बप्पा को विघ्नहर्ता कहा जाता है, यानी जो जीवन से हर तरह की रुकावट और परेशानी दूर करते हैं। जब भक्त कहते हैं “जय गणेश देवा”, तो यह केवल एक शब्द नहीं बल्कि आस्था, श्रद्धा और विश्वास का भाव होता है।

“जय” का मतलब है विजय या स्तुति करना, और “देवा” का मतलब है भगवान। यानी जब हम “जय गणेश देवा” कहते हैं, तो उसका भाव होता है-हे गणपति बप्पा, आप सदा विजयी रहें, आप हमारे रक्षक हैं और हम आपकी स्तुति कर रहे हैं।

गणेश जी को शुभारंभ का देवता माना गया है। किसी भी काम, पूजा या यात्रा से पहले उनका नाम लेना परंपरा है। इसलिए आरती में बार-बार “जय गणेश देवा” दोहराया जाता है ताकि हर भक्त के मन में विश्वास पैदा हो कि बप्पा साथ हैं।

यह वाक्य भक्त और भगवान के बीच एक प्यार भरा रिश्ता बनाता है। इसे बोलते ही मन में सकारात्मक ऊर्जा आती है और लगता है कि सारी मुश्किलें दूर हो जाएँगी। यही वजह है कि इस आरती का पहला और सबसे प्रमुख वाक्य “जय गणेश देवा” है।

Aarti Jai Ganesh Deva Lyrics in Hindi (हिंदी)

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा

माता जाकी पार्वती पिता महादेवा
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा

माता जाकी पार्वती पिता महादेवा
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा

एकदन्त दयावन्त चारभुजाधारी
एकदन्त दयावन्त चारभुजाधारी

माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी
माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी

एकदन्त दयावन्त चारभुजाधारी
एकदन्त दयावन्त चारभुजाधारी

माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी
माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी

पान चढ़े फूल चढ़े और चढ़े मेवा
हां पान चढ़े फूल चढ़े और चढ़े मेवा

लड्डुअन का भोग लगे सन्त करे सेवा
लड्डुअन का भोग लगे सन्त करे सेवा

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा

माता जाकी पार्वती पिता महादेवा
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा

अँधन को आँख देत कोढ़िन को काया
अँधन को आँख देत कोढ़िन को काया

बाँझन को पुत्र देत निर्धन को माया
बाँझन को पुत्र देत निर्धन को माया

अँधन को आँख देत कोढ़िन को काया
अँधन को आँख देत कोढ़िन को काया

बाँझन को पुत्र देत निर्धन को माया
बाँझन को पुत्र देत निर्धन को माया

सूर श्याम शरण आए सफल कीजे सेवा
आ सूर श्याम शरण आए सफल कीजे सेवा

माता जाकी पार्वती पिता महादेवा
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा

माता जाकी पार्वती पिता महादेवा
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा

दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी।
दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी।

कामना को पूर्ण करो, जाऊं बलिहारी॥
कामना को पूर्ण करो, जाऊं बलिहारी॥

दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी।
दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी।

कामना को पूर्ण करो, जाऊं बलिहारी॥
कामना को पूर्ण करो, जाऊं बलिहारी॥

दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी।
कामना को पूर्ण करो, जाऊं बलिहारी॥

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा

माता जाकी पार्वती पिता महादेवा
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा

माता जाकी पार्वती पिता महादेवा
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥

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Aarti Jai Ganesh Deva Lyrics in English (अंग्रेज़ी)

JAI GANESH JAI GANESH JAI GANESH DEVA
JAI GANESH JAI GANESH JAI GANESH DEVA

MAATA JAAKI PARVATI PITA MAHADEVA
MAATA JAAKI PARVATI PITA MAHADEVA

JAI GANESH JAI GANESH JAI GANESH DEVA
JAI GANESH JAI GANESH JAI GANESH DEVA

MAATA JAAKI PARVATI PITA MAHADEVA
MAATA JAAKI PARVATI PITA MAHADEVA

EKDANT DAYAAVANT CHAARBHUJADHAARI
EKDANT DAYAAVANT CHAARBHUJADHAARI

MAATHE SINDOOR SOHE, MOOSE KI SAWAARI
MAATHE SINDOOR SOHE, MOOSE KI SAWAARI

EKDANT DAYAAVANT CHAARBHUJADHAARI
EKDANT DAYAAVANT CHAARBHUJADHAARI

MAATHE SINDOOR SOHE, MOOSE KI SAWAARI
MAATHE SINDOOR SOHE, MOOSE KI SAWAARI

PAAN CHADHE PHOOL CHADHE AUR CHADHE MEWA
PAAN CHADHE PHOOL CHADHE AUR CHADHE MEWA

LADDUAN KA BHOG LAGE SANT KARE SEWA
LADDUAN KA BHOG LAGE SANT KARE SEWA

JAI GANESH JAI GANESH JAI GANESH DEVA
JAI GANESH JAI GANESH JAI GANESH DEVA

MAATA JAAKI PARVATI PITA MAHADEVA
MAATA JAAKI PARVATI PITA MAHADEVA

ANDHAN KO AANKH DET KODIN KO KAAYA
ANDHAN KO AANKH DET KODIN KO KAAYA

BAANJHAN KO PUTR DET NIRDHAN KO MAAYA
BAANJHAN KO PUTR DET NIRDHAN KO MAAYA

ANDHAN KO AANKH DET KODIN KO KAAYA
ANDHAN KO AANKH DET KODIN KO KAAYA

BAANJHAN KO PUTR DET NIRDHAN KO MAAYA
BAANJHAN KO PUTR DET NIRDHAN KO MAAYA

SUR SHYAM SHARAN AAE SAFAL KEEJE SEVA
SUR SHYAM SHARAN AAE SAFAL KEEJE SEVA

MAATA JAAKI PARVATI PITA MAHADEVA
MAATA JAAKI PARVATI PITA MAHADEVA

JAI GANESH JAI GANESH JAI GANESH DEVA
JAI GANESH JAI GANESH JAI GANESH DEVA

MAATA JAAKI PARVATI PITA MAHADEVA
MAATA JAAKI PARVATI PITA MAHADEVA

DEENAN KI LAAJ RAKHO, SHAMBHU SUTKAARI
DEENAN KI LAAJ RAKHO, SHAMBHU SUTKAARI

KAAMNA KO PURN KARO, JAAU BALIHARI
KAAMNA KO PURN KARO, JAAUN BALIHARI

DEENAN KI LAAJ RAKHO, SHAMBHU SUTKAARI
DEENAN KI LAAJ RAKHO, SHAMBHU SUTKAARI

KAAMNA KO PURN KARO, JAAU BALIHARI
KAAMNA KO PURN KARO, JAAUN BALIHARI

DEENAN KI LAAJ RAKHO, SHAMBHU SUTKAARI
KAAMNA KO PURN KARO, JAAUN BALIHARI

JAI GANESH JAI GANESH JAI GANESH DEVA
JAI GANESH JAI GANESH JAI GANESH DEVA

MAATA JAAKI PARVATI PITA MAHADEVA
MAATA JAAKI PARVATI PITA MAHADEVA

JAI GANESH JAI GANESH JAI GANESH DEVA
JAI GANESH JAI GANESH JAI GANESH DEVA

MAATA JAAKI PARVATI PITA MAHADEVA
MAATA JAAKI PARVATI PITA MAHADEVA

किसने गाई है Aarti Jai Ganesh Deva 

Aarti Jai Ganesh Deva Lyrics को कई प्रसिद्ध गायकों ने अपनी आवाज़ दी है। इन गायकों की मधुर और भक्तिपूर्ण आवाज़ आरती को और भी खास बनाती है।

Anuradha Paudwal

अनुराधा पौडवाल जी की आवाज़ में Aarti Jai Ganesh Deva Lyrics सुनना भक्तों के लिए एक आध्यात्मिक अनुभव है। उनकी मधुर और साफ आवाज़ आरती के हर शब्द में भक्ति और श्रद्धा का भाव भर देती है।

वह पारंपरिक शैली के साथ भावनाओं को इतनी सहजता से प्रस्तुत करती हैं कि हर कोई आसानी से आरती के बोल और अर्थ को समझ सकता है। उनकी आवाज़ ने इस आरती को घर-घर और मंदिरों में बेहद लोकप्रिय बना दिया है।

Lakhbir Singh Lakkha

लखबीर सिंह लक्का ने भी इस आरती को अपनी खास शैली और भक्ति भाव के साथ गाया है। उनकी आवाज़ में गाते ही मन में श्रद्धा जाग उठती है।

लक्का जी की मधुरता और गीत की भावनाओं का मेल सुनने वालों के मन को आध्यात्मिक शांति देता है। उनके स्वर में पारंपरिक भक्ति के साथ आधुनिक भाव भी मिलता है, जिससे हर उम्र के लोग आरती में शामिल होकर भगवान गणेश को प्रणाम कर सकते हैं।

Mahendra Kapoor

महेंद्र कपूर जी की आवाज़ में गाई गई Aarti Jai Ganesh Deva Lyrics पारंपरिक और गंभीर शैली का अनुभव देती है। उनकी आवाज़ की गंभीरता और भक्ति भाव आरती के हर शब्द को और प्रभावशाली बना देता है। महेंद्र कपूर जी की शैली में आरती सुनने से भक्तों का मन शांत होता है और घर का वातावरण पवित्र बन जाता है। उनकी आवाज़ ने इस आरती को और भी लोकप्रिय और सम्मानित बना दिया है।

Hansraj Raghuwanshi

हंस राज रघुवंशी की आवाज़ में Aarti Jai Ganesh Deva Lyrics को सुनना एक नया अनुभव देता है। उनकी आवाज़ में आधुनिक शैली और भक्ति का अनोखा मिश्रण है।

रघुवंशी जी की मधुर और स्पष्ट आवाज़ आरती को भावपूर्ण बनाती है। उनके स्वर में भगवान गणेश के प्रति श्रद्धा और भक्ति का भाव हर श्रोता तक आसानी से पहुँचता है।

Sadhana Sargam

साधना सरगम जी की आवाज़ में Aarti Jai Ganesh Deva Lyrics बेहद मधुर और सजीव लगती है। उनकी आवाज़ की मिठास और भक्ति का भाव सुनकर भक्तों का मन पूरी तरह भगवान गणेश में लीन हो जाता है।

साधना सरगम के गाने का तरीका इतना सहज और भावपूर्ण है कि आरती गाते ही वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर जाता है। उनकी आवाज़ में आरती सुनने का अनुभव बहुत शांतिपूर्ण और आनंददायक होता है।

Aarti Jai Ganesh Deva Lyrics Importance & Benefits (महत्व और लाभ)

“जय गणेश देवा” आरती का नियमित जाप करने से घर में सुख-समृद्धि, सफलता और सकारात्मकता आती है, तथा सभी प्रकार के विघ्न दूर होते हैं। इस आरती को करने से आध्यात्मिक आनंद की अनुभूति होती है, मन की स्पष्टता आती है, और नकारात्मकता घर से दूर हो जाती है। गणेश जी को बुद्धि और ज्ञान के देवता भी माना जाता है, इसलिए उनकी आरती करने से सद्बुद्धि प्राप्त होती है और जीवन के हर क्षेत्र में सफलता मिलती है। 

आरती का महत्व (Significance of Aarti)

विघ्न निवारण:

गणेश जी को विघ्नहर्ता कहा जाता है, और उनकी आरती करने से सभी बाधाएँ और कष्ट दूर हो जाते हैं।

आध्यात्मिक लाभ:

आरती का जाप भक्तों को दिव्य आनंद और आध्यात्मिक ज्ञान प्रदान करता है।

सकारात्मक ऊर्जा:

यह घर और आसपास के वातावरण से नकारात्मक ऊर्जा को दूर करती है और सकारात्मकता लाती है।

सफलता और समृद्धि:

आरती के माध्यम से गणेश जी से धन, सुख और सफलता का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

सद्बुद्धि की प्राप्ति:

बुद्धि के देवता होने के कारण गणेश जी की आरती से सद्बुद्धि और सही निर्णय लेने की क्षमता मिलती है।

आरती के लाभ (Benefits of Aarti)

सुख-समृद्धि:

नियमित रूप से आरती करने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

भाग्य में वृद्धि:

गणपति आरती करने से व्यक्ति का भाग्य जागृत होता है।

आर्थिक प्रगति:

गणेश जी की कृपा से घर में धन-दौलत की कमी नहीं होती है और आर्थिक प्रगति होती है।

सभी क्षेत्रों में सफलता:

किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत से पहले गणेश जी की आरती करने से वह कार्य निर्विघ्न रूप से संपन्न होता है, जिससे हर क्षेत्र में सफलता मिलती है।

मन की स्पष्टता:

च्रकरों के खुलने से मन में स्पष्टता आती है और सही निर्णय लेने में मदद मिलती है।

निष्कर्ष 

“Aarti Jai Ganesh Deva Lyrics” भगवान गणेश जी की सबसे लोकप्रिय आरती है। इसे गाने से हर भक्त के मन में विश्वास और भक्ति का भाव जागता है। गणेश जी को विघ्नहर्ता कहा जाता है, यानी जो हर कठिनाई दूर करते हैं और जीवन में सुख-शांति लाते हैं। जब कोई बच्चा या बड़ा यह आरती गाता है, तो उसे लगता है कि बप्पा उसके साथ खड़े हैं।

आरती गाने से घर का माहौल पवित्र हो जाता है। रोज़ पूजा के समय, मंगलवार, संकष्टी चतुर्थी और खासकर गणेश चतुर्थी पर यह आरती जरूर गाई जाती है। इसके बोल इतने आसान हैं कि छोटा बच्चा भी सीख सकता है और बड़े भी पूरे भाव से गा सकते हैं।

“Aarti Jai Ganesh Deva Lyrics” सिर्फ एक प्रार्थना नहीं है, यह भक्त और भगवान के बीच का प्यार और विश्वास है। इसे गाने से मन को शांति, आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। बप्पा का आशीर्वाद जीवन में सफलता और समृद्धि लाता है।

Aarti-Om-Jai-Jagdish-Hare

हमारे देश में पूजा-पाठ का सबसे अहम हिस्सा होती है आरती। जब भी घर या मंदिर में भगवान की पूजा की जाती है, तो अंत में आरती गाकर पूजा को पूर्ण माना जाता है।

आरती से वातावरण में भक्ति, शांति और सकारात्मक ऊर्जा फैलती है। इन्हीं में सबसे प्रसिद्ध और प्रिय आरती है Om Jai Jagdish Hare Aarti Lyrics

यह आरती इतनी लोकप्रिय है कि चाहे मंदिर हो या घर, हर जगह इसे गाया जाता है। जगदीश भगवान विष्णु का ही दूसरा नाम हैं| कहते हैं कि इसे गाने से भगवान जगदीश कृपा बरसाते हैं, दुख-दर्द दूर करते हैं और सुख-शांति का आशीर्वाद देते हैं।

“जगदीश” शब्द का अर्थ है जगत के ईश्वर, यानी वह भगवान जो पूरी सृष्टि का पालन और रक्षा करते हैं। जब भक्त इस आरती को गाते हैं तो उन्हें आत्मिक सुकून और गहरी भक्ति का अनुभव होता है।

Om Jai Jagdish Hare Aarti Lyrics गाने और याद करने में बहुत आसान है, इसलिए यह बच्चों से लेकर बड़ों तक सबके दिल को छू जाती है।

इस ब्लॉग में हम जानेंगे जगदीश भगवान का स्वरूप, आरती के हिंदी और इंग्लिश लिरिक्स, इसका महत्व और लाभ, साथ ही निष्कर्ष और अक्सर पूछे जाने वाले सवाल भी।

जगदीश भगवान का स्वरूप

हिंदू धर्म में भगवान को उनके अलग-अलग गुणों और कार्यों के आधार पर कई नामों से पुकारा जाता है। “जगदीश” शब्द का अर्थ है जगत के ईश्वर। यानी वे भगवान जो पूरे संसार की रक्षा करते हैं और सबको जीवन देने वाले हैं। जब हम Om Jai Jagdish Hare Aarti Lyrics गाते हैं तो उसमें भी भगवान को उनके विभिन्न नामों से याद किया जाता है।

भगवान विष्णु को ही जगदीश कहा जाता है और उनके बहुत से नाम प्रचलित हैं। जैसे –

  • गोविंद : इसका अर्थ है गऊ और भक्तों की रक्षा करने वाले।
  • मधुसूदन : जिन्होंने असुर मदु का वध किया और धर्म की रक्षा की।
  • केशव : जिनके केश सुन्दर और मनमोहक हैं, और जिन्हें सृष्टि का रचयिता भी कहा जाता है।
  • हरि : जो पाप और दुख हर लेते हैं और भक्तों को मुक्ति देते हैं।
  • विष्णु : सृष्टि के पालनकर्ता और त्रिदेवों में एक।

इन नामों में सिर्फ संबोधन नहीं बल्कि गहरे अर्थ और आशीर्वाद छिपे हैं। जब भक्त Om Jai Jagdish Hare Aarti Lyrics गाते हैं और इन नामों का स्मरण करते हैं, तो उन्हें ऐसा लगता है जैसे भगवान उनकी हर प्रार्थना सुन रहे हों। यही वजह है कि आरती का माहौल भक्तों के मन को शांति और विश्वास से भर देता है।

Om Jai Jagdish Hare Aarti Lyrics in Hindi (हिंदी में)

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट, दास जनों के संकट,
क्षण में दूर करे
॥ ॐ जय जगदीश हरे॥

जो ध्यावे फल पावे, दुख विनसे मन का।
स्वामी दुख विनसे मन का, सुख-सम्पत्ति घर आवे
सुख-सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का
॥ ॐ जय जगदीश हरे ॥

मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूँ किसकी।
स्वामी शरण गहूँ किसकी, तुम बिन और न दूजा
तुम बिन और न दूजा, आस करूँ जिसकी
॥ ॐ जय जगदीश हरे ॥

तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी।
स्वामी तुम अन्तर्यामी, पारब्रह्म परमेश्वर
पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी
॥ ॐ जय जगदीश हरे ॥

तुम करुणा के सागर, तुम पालनकर्ता।
स्वामी तुम पालनकर्ता, मैं मूरख फल कामी
मैं सेवक तुम स्वामी, कृपा करो भर्ता
॥ ॐ जय जगदीश हरे ॥

तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणप्यारे।
स्वामी सबके प्राणप्यारे, देवन के देव महादेव,
तुम संकट हारे
॥ ॐ जय जगदीश हरे ॥

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट, दास जनों के संकट,
क्षण में दूर करे
॥ ॐ जय जगदीश हरे ॥

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Om Jai Jagdish Hare Aarti Lyrics in English (अंग्रेज़ी में)

OM JAI JAGDISH HARE, SWAMI JAI JAGDISH HARE
BHAKT JANON KE SANKAT, DAAS JANON KE SANKAT
SHAN MEIN DOOR KAREIN,
|| OM JAI JAGDISH HARE ||

|| JO DHYAAWE FAL PAAVE, DUKH VINSE MAN KA
SWAMI DUKH VINSE MAN KA, SUKH-SAMPATTI GHAR AAVE
SUKH-SAMPATTI GHAR AAVE, KASHT MITE TAN KA
|| OM JAI JAGDISH HARE ||

MAAT-PITA TUM MERE, SHARAN GAHUN MAI KISKI
SWAMI SHARAN GAHUN MAI KISKI, TUM BIN AUR NA DUJA
TUM BIN AUR N DUJA, AAS KARUN JISKI
|| OM JAI JAGDISH HARE ||

|| TUM PURAN PARMAATMA, TUM ANTARYAAMI
SWAMI TUM ANTARYAAMI, PAARBHRAM PARMESHWAR
PAARBHRAM PARMESHWAR, TUM SABKE SWAMI
|| OM JAI JAGDISH HARE ||

|| TUM KARUNA KE SAAGAR, TUM PAALANKARTA
SWAMI TUM PAALANKARTA, MEIN MURAKH FAL KAAMI
MAIN SEVAK TUM SWAMI, KRIPA KARO BHAARTA
|| OM JAI JAGDISH HARE ||

|| TUM HO EK AGOCHAR, SABKE PRAANPYAARE
SWAAMI SABKE PRAANPYAARE, DEVAN KE DEV
MAHADEV, TUM SANKAT HAARE
|| OM JAI JAGDISH HARE ||

|| OM JAI JAGDISH HARE, SWAMI JAI JAGDISH HARE
BHAKT JANON KE SANKAT, DAAS JANON KE SANKAT
SHAN MEIN DOOR KAREIN
|| OM JAI JAGDISH HARE ||

Om Jai Jagdish Hare Aarti Lyrics Importance & Benefits (महत्व और लाभ)

आरती का महत्व

हिंदू धर्म में, आरती को पूजा का सबसे पवित्र और आवश्यक अंग माना जाता है। आरती गाना केवल ईश्वर की स्तुति ही नहीं, बल्कि उन्हें समर्पित करने का भी प्रतीक है। जब दीपक प्रज्वलित होता है और आरती की धुन गूंजती है, तो ऐसा लगता है जैसे कोई दिव्य शक्ति वातावरण में व्याप्त हो गई हो।

ओम जय जगदीश हरे आरती के बोल का महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि यह सभी को भक्ति से जोड़ता है। आरती गाने से एकाग्रता, परिवार और समाज में एकता की भावना और घर में पूर्णतः सकारात्मक वातावरण का निर्माण होता है। यह आरती भक्त और ईश्वर के बीच एक मज़बूत बंधन बनाती है।

आरती के लाभ

  • सबसे बड़ा लाभ मन की शांति है। जब हम ओम जय जगदीश हरे आरती के बोल गाते हैं, तो हमारे कष्ट कम होने लगते हैं और आत्मा को शांति मिलती है।
  • ऐसा माना जाता है कि नियमित रूप से आरती करने से घर से नकारात्मकता दूर होती है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। इसके अलावा, यह आरती सुख-समृद्धि का आशीर्वाद भी देती है।
  • भक्तों का मानना है कि आरती गाने से भगवान दुख-दर्द दूर करते हैं, बीमारियों से रक्षा करते हैं और सभी कार्यों में सफलता प्रदान करते हैं।
  •  बच्चे, बड़े और बुजुर्ग, सभी इस आरती को गाकर जीवन में भक्ति और आशा पाते हैं।

निष्कर्ष

हर पूजा-पाठ का सबसे सुन्दर पल वह होता है, जब अंत में आरती गाई जाती है| आरती गाने से भक्ति का माहौल बन जाता है और मन भगवान के और करीब महसूस करता है|

Om Jai Jagdish Hare Aarti Lyrics भी ऐसी ही आरती है जो हर मंदिर और हर घर में बड़े प्यार से गाई जाती है| इस आरती का महत्व सिर्फ़ गीत तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह भगवान से जुड़ने का सबसे आसन और पवित्र तरीका है|

जब हम Om Jai Jagdish Hare Aarti Lyrics गाते हैं तो हमें यह एहसास होता है कि भगवान हमारे दुख-दर्द दूर कर रहे हैं और हमें शान्ति दे रहे हैं| य

ह आरती बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी के लिए सरल और याद रखने योग्य है| इसकी धुन और बोल इतने मधुर हैं की सुनते ही मन को सुकून मिल जाता है| 

इस आरती से हमें यह सीख मिलती है की विश्वास और श्रद्धा से किया गया हर भजन और प्रार्थना भगवान तक पहुँचती हैं|

इसलिए, अगर आप चाहते हैं की आपके घर में सकारात्मक ऊर्जा और खुशियों का वास बना रहे, तो नियमित रूप से Om Jai Jagdish Hare Aarti Lyrics गाना सबसे अच्छा उपाय है|  

Hariharan-Shree-Hanuman-ji-Ki-Aarti-Lyrics

हनुमान जी की आरती एक ऐसी भक्ति गीत है जो हमारे दिल को शांति और ताकत दोनों देती है। जब बात आती है हरिहरन जैसे मशहूर गायक के द्वार गई हनुमान जी की आरती की, तो उसका एक अलग ही एहसास होता है।

हरिहरन की मधुर आवाज और भक्ति भरा अंदाज इस आरती को और भी ज्यादा दिल को छूने वाली बना देता है। आज कल काई लोग आरती को अपने दिन की शुरुआत करते हैं, या फिर जब मन उदास होता है तब अपनी हिम्मत बढ़ाने के लिए।

क्या आरती में हनुमान जी के बल हैं, भक्ति और सेवा के गुणों का वर्णन है, जो हर भक्त के लिए प्रेरणा का स्रोत बनता है। हरिहरन की भावपूर्ण गायकी के साथ, ये आरती एक आध्यात्मिक अनुभव बन जाती है जो आपके मन को शांत और आत्मा को प्रकाशित कर देती है।

हरिहरन कौन है?

हरिहरन एक बहुत ही मशहूर भारतीय पार्श्व गायक और शास्त्रीय गायक हैं। उनकी आवाज़ इतनी भावपूर्ण और अभिव्यंजक है कि सुनते ही दिल को सुकून मिलता है। हरिहरन ने अपने करियर की शुरुआत शास्त्रीय संगीत से की थी, लेकिन बाद में उन्हें फिल्मी गाने, भक्ति गीत और फ्यूजन संगीत में भी अपनी पहचान बनाई। उनका संगीत शैली अनोखा है – वो शास्त्रीय सुरों को आधुनिक स्पर्श के साथ मिला कर गाते हैं, जो हर पीढ़ी के लोगों को पसंद आता है। 

हरिहरन ने कई भक्ति गीतों को भी अपनी आवाज दी है, जिसमें हनुमान जी की आरती भी शामिल है। उनकी आवाज में जो भक्ति और जज़्बा होता है, वो सुनने वालों के मन को सीधा हनुमान जी के सामने ले जाता है। इसलिए जब हरिहरन हनुमान जी की आरती गाते हैं, तो वो एक अलग ही आध्यात्मिक भावना पैदा करते हैं, जो सभी भक्तों के लिए एक विशेष अनुभव होता है।

हरिहरन श्री हनुमान जी की आरती लिरिक्स हिंदी में  (HINDI में)

|| लाल देह लाली लसै अरु धरी लाल लंगुर बज्र देह दानव
दलन जय जय जय कपी सुर पवन सुत हनुमान की जय ||

||आरती कीजे हनुमान लला की
आरती कीजे हनुमान लला की||

||आरती कीजे हनुमान लला की
आरती कीजे हनुमान लला की||

||दुष्ट दलन रघुनाथ कला की
आरती कीजे हनुमान लला की||

|| आरती कीजे हनुमान लला की ||

|| जाके बल से गिरिवर कांपें
रोग दोष जाके निकट ना झापें,
अंजनी पुत्र महा बलदाई
संतन के प्रभु सदा सुहाई ||

|| आरती कीजे हनुमान लला की
आरती कीजे हनुमान लला की ||

|| दे बीरा रघुनाथ पठाए
लंका जारि सिय सुधि लाए,
लंका सो कोट समुद्र सी खाई
जात पवनसुत बार न लाई ||

|| लंका जारि असुर संहारे
सियाराम जी के काज सवारें||

|| आरती कीजे हनुमान लला की
आरती कीजे हनुमान लला की ||

|| लक्ष्मण मुर्छित पड़े सकारें
आनी संजीवन प्राण उबारें ||

पैठी पताल तोरी जम कारें
अहिरावण की भुजा उखारें ||

|| बाई भुजा असुर-दल मारें
दहिनी भुजा संत जन तारे ||

|| आरती कीजे हनुमान लला की
आरती कीजे हनुमान लला की ||

|| सुर नर मुनि आरती उतारें
जय जय जय हनुमान उचारें,
कंचन थाल कपूर लों छायीं
आरती करत अंजना माई ||

|| जो हनुमान की आरती गावें
बसी बैकुंठ परम पद पावें ||

|| आरती कीजे हनुमान लला की ||
|| आरती कीजे हनुमान लला की ||

|| आरती कीजे हनुमान लला की ||
|| आरती कीजे हनुमान लला की ||

Hariharan-Shree-Hanuman-ji-Ki-Aarti-Lyrics-1

हरिहरन श्री हनुमान जी की आरती लिरिक्स अंग्रेजी में   (English में)

|| LAAL DEH LAALI LASAI ARU DHARI LAAL LANGUR BAJRA DEH
DAANAV DALAN JAI JAI JAI KAPI SUR PAWAN SUT HANUMAN KI JAI ||

|| AARTI KEEJE HANUMAN LALAA KI
AARTI KEEJE HANUMAN LALAA KI ||

||AARTI KEEJE HANUMAN LALAA KI
AARTI KEEJE HANUMAN LALAA KI ||

|| DUSHTDALAN RAGHUNATH KALA KI
AARTI KEEJE HANUMAN LALAA KI
AARTI KEEJE HANUMAN LALAA KI ||

|| JAAKEIN BAL SE GIRIVAR KAANPEIN
ROG DOSH JAAKE NIKAT NA JHAANPEIN
ANJANI PUTRA MAHABALDAAI
SANTAN KE PRABHU SADAA SUHAAI ||

|| AARTI KEEJE HANUMAN LALAA KI
AARTI KEEJE HANUMAN LALAA KI ||

|| DE BEERA RAGHUNATH PATHAAYE
LANKA JAARI SIYA SUDDHI LAAYE
LANKA SAU KOT SAMUDRA SI KHAAEIN
JAAT PAWAN SUT BAR NA LAAYEIN ||

|| LANKA JAARI ASUR SANHAARE
SIYARAM JI KE KAAJ SAWAARE ||

|| AARTI KEEJE HANUMAN LALAA KI
AARTI KEEJE HANUMAN LALAA KI ||

|| LAKSHMAN MURCHHIT PADE SAKAARE
AANI SANJEEVAN PRAAN UBAARE
PAITHI PATAAL TORI JAM KAARE
AHIRAAVAN KI BHUJA UKHAARE ||

|| BAAYEIN BHUJA ASUR DAL MAARE
DAHINI BHUJA SANT JAN TAARE ||

|| AARTI KEEJE HANUMAN LALAA KI
AARTI KEEJE HANUMAN LALAA KI ||

|| SUR NAR MUNI AARTI UTAAREIN
JAI JAI JAI HANUMAN UCHAAREIN
KANCHAN THAAL KAPOOR LAU CHAAI
AARTI KARAT ANJANA MAAI ||

|| JO HANUMAN KI AARTI GAAVEIN
BASI BAIKUNTH PARAMPAD PAAVEIN ||

|| AARTI KEEJE HANUMAN LALAA KI ||
|| AARTI KEEJE HANUMAN LALAA KI ||

|| AARTI KEEJE HANUMAN LALAA KI ||
|| AARTI KEEJE HANUMAN LALAA KI ||

हरिहरन श्री हनुमान जी की आरती का महत्व

हनुमान जी की आरती सिर्फ एक गीत नहीं है, बल्कि भक्ति का एक शक्तिशाली रूप है। इसे गाने या सुनने से मन में शांति, हिम्मत और सकारात्मक ऊर्जा आती है।

जब हम हनुमान जी की आरती करते हैं, तो वो एक तरह से उनके चरणों में अपनी श्रद्धा और प्रेम अर्पण करना होता है। हनुमान जी को “संकट मोचन” कहा जाता है, मतलब जो भी दिक्कत हो, वो उनका नाम लेने से दूर हो जाती है।

आरती के समय दिया, धूप, और घंटी की आवाज़ के साथ जब उनका गुण गान होता है, जिससे पूरा महौल पवित्र हो जाता है।

कहा जाता है कि जो भक्त नियम से हनुमान जी की आरती करता है, उसकी सुरक्षा स्वयं बजरंगबली करते हैं, और उसके जीवन में से डर, नकारात्मक सोच और बाधाएं दूर हो जाती हैं ।

महत्वपूर्ण बिंदु:

  • मन को शांति मिलती है और चित्त एकाग्रता होती है।
  • हर मुश्किल और संकट में हौसला बनता है।
  • भक्तों की सुरक्षा अपने बाल से करते हैं।
  • नकारात्मक ऊर्जा द्वार होती है और घर में पवित्रता आती है।
  • भक्ति का गहरा अनुभव होता है।

हरिहरन श्री हनुमान जी की आरती को गाने या सुनने का सही समय और विधि

हनुमान जी की आरती के दिन में कोई भी समय जा सकता है, लेकिन सुबह और शाम का समय सबसे अच्छा माना जाता है। सुबह आरती करने से पूरे दिन में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है, और शाम आरती करने से दिन भर की थकान और तनाव दूर हो जाती है। 

सही समय:

  • सुबह ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से पहले) या सूर्योदय के तुरंत बाद।
  • शाम संध्या समय (सूर्यस्त के बाद)।
  • मंगलवार और शनिवार को आरती का विशेष महत्व होता है।

विधि:

  1. स्नान करके साफ वस्त्र पहचानें।
  2. हनुमान जी के सामने एक दीया (तेल या घी का) जलाएं।
  3. धूप या अगरबत्ती प्रज्वलित करें।
  4. फूल, सिन्दूर और प्रसाद अर्पण करें (लड्डू या बूंदी विशेष रूप से)।
  5. आरती के गीत को श्रद्धा और ध्यान से गायें या सुनें।
  6. आरती के बाद हनुमान जी की जय-जयकार करें।
  7. प्रसाद सभी को बांट दें

ये विधि और समय का पालन करने से भक्ति का अनुभव और भी गहरा होता है, और हनुमान जी की कृपा सदा बनी रहती है।

हरिहरन जी द्वारा गाई गई हनुमान जी की आरती के लाभ

हरिहरन की आवाज में हनुमान जी की आरती सुनना एक अलग ही अनुभव देता है। उनकी मधुर, गहरी और भक्ति से भरी आवाज इंसान को शांत कर देती है और दिल में एक सुकून का एहसास जगाता है। ये आरती सिर्फ गीत नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक अनुभव बन जाती है जो भक्त को हनुमान जी से और करीब ले आता है।

मुख्य लाभ:

  • भक्ति भावना गहरी होती है और श्रद्धा बढ़ती है।
  • सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है, नकारात्मक सोच दूर होती है।
  • जीवन में संकटों का समाधान मिलता है।
  • हनुमान जी की कृपा से हिम्मत, शक्ति और सुरक्षा का आशीर्वाद मिलता है।
  • घर का माहौल पवित्र और शांत बन जाता है।

हरिहरन की आवाज का असर इतना गहरा होता है कि आरती सुनते ही भक्त का ध्यान स्वयं हनुमान जी पर केन्द्रित हो जाता है, और मन एकदम हल्का लगता है।

आरती करते समय ध्यान रखने योग्य बातें

हनुमान जी की आरती एक पवित्र क्रिया है, इसलिए इसके समय कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है ताकि भक्ति का अनुभव और भी गहरा हो।

ध्यान रखें योग्य बातें:

  • आरती से पहले शरीर और मन दोनों को पवित्र करें।
  • आरती हमेशा श्रद्धा, शांत मन और ध्यान के साथ करें।
  • दीया हमेशा घी या सरसों के तेल का जलाएं, और उसका मुख हनुमान जी की या हो।
  • धूप या अगरबत्ती आरती के साथ जरूर जलाएं।
  • आरती के गीत के शब्द सही उच्चारण के साथ गाएं या सुनें।
  • आरती के समय पूजा स्थल में उचित रोशनी और साफ-सफाई हो।
  • आरती के बाद हनुमान जी की जय-जयकार करें और प्रसाद बांटना न भूलें।
  • आरती हमेशा समय पर करें, बिना जल्दी-बाजी के।

इन बातों का ध्यान रखने से आरती का असर बढ़ता है और हनुमान जी की कृपा सदा बनी रहती है।

निष्कर्ष 

हरिहरन द्वार गई हनुमान जी की आरती सिर्फ एक गीत नहीं, बल्कि एक ऐसा भक्ति अनुभव है जो दिल को शांति, मन को एकाग्रता और जीवन में साकारात्मक ऊर्जा से भर देता है। हरिहरन की मधुर आवाज और उनकी भक्ति भारी प्रस्तुति, आरती के शब्दों के साथ मिलकर एक ऐसी आध्यात्मिक लहर पैदा करती है जो भक्त को बजरंगबली के चरणों में ले जाती है।

हनुमान जी की आरती गाने या सुनने का महत्व सिर्फ पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बाल्की ये हमारे जीवन में हिम्मत, धैर्य और सुरक्षा का आशीर्वाद लाती है। मंगलवार और शनिवार के दिन आरती का विशेष महत्व होता है, लेकिन अगर आप इसे रोज करते हैं तो इसका असर और भी गहरा होता है।

चाहे दिन की शुरुआत हो या शाम दिन के अंतिम समय, हनुमान जी की आरती से घर का महल पवित्र होता है, मन की चिंता दूर होती है और संकटों से मुक्ति मिलती है। इसलिए, हरिहरन की आवाज में हनुमान जी की आरती को अपनी भक्ति की दिनचर्या में शामिल करें, आप बजरंगबली की कृपा सदा अपने साथ बना सकते हैं।

tirupati-balaji-temple-booking

Tirupati Balaji Temple, also known as Tirumala Venkateswara Temple, is one of the most visited temples in India. Being on the spiritual wishlist of millions of devotees, the temple welcomes lakhs of pilgrims from all corners of the world to seek the blessings of Lord Venkateswarai. 

If you are here reading this blog, you might also be planning a trip to the most spiritually important place. Situated in the serene Triumala hills of Andhra Pradesh, the temple is not only a place of worship but a pilgrimage that reunites with religion, divine blessings, and devotions.

Due to a huge number of devotees visiting the temple, making an itinerary for a trip to the temple can be confusing. Pilgrims often ask such questions as What kind of Darshan do you opt for, How much is the ticket price, and What time of day is best to visit. But not any longer.

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In this blog, we are going to cover all that you want to know to plan your pilgrimage to Tripuati Balaji Temple. From types of darshan and Tirupati Online booking to darshan timing and passes. Let’s begin!

Introduction to Tirupati Balaji Temple 

Tirupati Balaji Temple, situated at Tirumala, is one of the sacred Hindu temples that has high spiritual values for Hindus. The main God of the temple is Lord Venkateswara, commonly known as Balaji. There is, by belief, an idol, naturally grown out of the earth, of a black stone.

As per the Puranas, the temple is said to be the holy place where Lord Vishu appeared on Earth to bless people. Doing a darshan of lord Balaji fulfils all the wishes, helps in attaining moksha (free from the life cycle of birth and death), and removes all the hurdles.

That’s why he is also called “God of Kaliyug”. The temple is among the richest temples in the world and a popularly visited site by pilgrims and visitors. Here are some key highlights of the temple:

  • Major Deity: Lord Venkateswara, an incarnation of Lord Vishnu. 
  • Location: In Trimulla, near the city of Tirupati, Andhra Pradesh
  • Unique Ritual: Devotees donate hair to show their gratitude. 
  • Architecture: Made in Dravadian style with detailed carving. 
  • Spiritual belief: the temple is considered the Earthly home of Lord Vishnu

Types of Darshan at Tirupati Balaji Temple (With Timings & Fees)

Types of Darshan/Seva  Timings  Fees  Details 
Sarva Darshan (Free Darshan) Normal days for 18 hours and peak days for 20 hours  Free Open for all devotees without a ticket 
Slotted Sarva Darshan Tokens are available from 5:00 AM  Free  The Darshan token is for a limited time only. 
Special Entry Darshan Changes daily (check on TTD site) ₹300 per person + ₹25 for prasad Paid darshan with shorter waiting time. 
Special Entry Darshan for Parents with Infants 11:00 AM – 5:00 PM (all days) Free  For parents with a child below 1 year old. 
Darshan for Senior Citizens & Differently Abled 3:00 PM (Monday to Saturday) Free Priority darshan for the eligible devotee
VIP break darshan  40-45 minute darshan  ₹500 (Non-protocol VIP) or via SRIVANI Trust donation For quick darshan 
NRI Special Entry Darshan 11:00 AM to 7:00 PM  ₹300 (with a valid passport/ID) For NRI and foreign visitors)
Vasanthotsavam 2:30 to 3:00 PM  ₹300 Daily darshan with flower offering
Sahasra Deepalankara Seva 5:00 PM – 5:30 PM ₹200 Evening darshan with diya offering 
Arjitha Brahmotsavam 12:30 to 2:00 PM  ₹200 Short Brahmotsavam seva 
Kalyanotsavam 10:00 AM – 12:00 PM ₹1,000 Ritual showcasing a celestial marriage ceremony 
Visesha Pooja 6:00 AM – 6:30 AM (On each Monday) ₹600 Special Seva is done once a week by devotees
Unjal seva  6:00 PM – 7:00 PM ₹1,500 Swing ceremony where the divine is seated on an ornate swing. 
Suprabhata Seva  4:00 AM – 4:30 AM ₹120 An early morning ritual that includes waking up the lord with hymns. 
Thomala Seva (Garland Offering) 6:00 AM – 7:30 AM ₹220 Decorating the deity with garlands 
Abhishekam  4:30 AM – 5:30 AM ₹750 A scared bath is offered to the Lord 
Sahasra Kalasabhishekam 6:00 AM – 7:00 AM ₹1000 Ritual performed with 1000 Kalash 
Astadala Pada Padmaradhana  7:00 AM – 8:00 AM ₹500 Darshan of the Golden Lotus feet of the Lord 
Tirumala Seva Darshan (Special Seva) Varies (Check official TTD site for timing) N/A Darshan via a certain booked seva 

Note: The darshan timing given above can vary during the festivals or any special occasion. Therefore, you should always check the TTD official site before visiting the temple. 

How to Choose the Right Darshan at Tirupati Balaji Temple?

Too many darshan options, right? We will ease you a bit. The choice of the right darshan time in Tripuarti Balaji Temple is primarily based on your budget, choices, and time. If you want free darshan and do not have any problem waiting for a short time, the Sarva Darshan can be a good option.

But for the people who want instant darshan, they have to pay ₹300 or ₹500 for Special Entry darshan or VIP darshan.

tirupati-balaji-temple There is also a darshan facility available for families with babies, senior citizens, or disabled individuals. If you are among them, then you can choose Darshan for Senior Citizens & Differently Abled and Special Entry Darshan for Parents with Infants. No charges are levied on these kinds of darshan.

Also, if apart from darshan, you’re interested in other rituals, tickets for seva like Suprabhata Seva, Kalyanotsavam, or Abhishekam can be booked. Such sacred practices allow devotees to be a part of their tradition and connect with the divine.

Online Booking for Tirupati Balaji Darshan

Devotees also have an opportunity to obtain a ticket online to the Tirupati temple. Booking not only makes your trip easier, but you also save time by not standing in line for hours.

How to Book Darshan Tickets Online (Step-by-Step Procedure)

Steps

  1. Visit the official website of Tirumala Tirupati Devasthanams (TTD).
  2. For login, you should provide your mobile number.
  3. Choose which type of darshan/ seva you’d like to attend.
  4. Select the date and time now as per your trip itinerary.
  5. You shall provide personal data, such as name, age, gender, and ID document, in the following step.
  6. Pay online now based on the types of darshan or seva you have been choosing.

Note: Generally, tickets are available a month before the date of darshan on the TTD website for booking. 

How to Book Tirupati Balaji Temple Darshan Tickets Offline?

For Tirupati Darshan, offline tickets are available at both the Tirumala and Tirupati counters. Some of the common ticket counters include Sri Govindaraja Choultries, Vishnu Nivasam, and Srinivasam Complex. Below, we have mentioned some essential points that you have to keep in mind while offline booking: 

  1. ID Proof: Identity: A valid identity proof, such as Aadhar, driving license, or passport, is necessary when one books a pass at the counter.
  2. Ticket Availability: Around 10,000 to 15,000 offline tickets are available in a day and given on basis of first come and get first served.
  3. Timings: The general timing of the counter is between 5:00 AM and 6:00 PM.
  4. Advance Ticket: Tirupati Balaji Darshan Pass is usually provided one day in advance, so plan your visit.

Cancellation and Refund Policies for Tirumala Balaji Darshan Tickets

The darshan and seva tickets for the Trimula temple are non-cancelable and non-refundable once booked. Not just that, even the donations you once made are also non-refundable. This is the reason why you have to be keen on the TTD terms and conditions before you settle on the booking.

How to Reach Tirupati Balaji Temple? How to Reach Tirupati Balaji Temple?

The Tirupati Balaji temple is very accessible; you have no shortage of means to reach the temple by transport. Trimulla has a bus, cab and taxi service available to the temple. All because of the Indian government for providing well-connected roads, rail, and air transport.

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1.  By Air

Tirupati Airport is the closest airport to the temple. The Tirupati Balaji Temple is around 40 km from the airport and 1 to 1.5 hours away. You can reach the temple in comfort by a pre-paid taxi or airport cab.

2. By Rail

If you are coming by railway, then the nearest railway station to the temple is Triparti Railway Station. It is approximately 26 km from the temple. You can book TTD buses or private cabs to reach a temple, as it is the most convenient mode of transportation. 

3. By Road

If you are going by private vehicle or bus, then there are excellent roads to all the major cities of India. Plus, you will get various TTD buses and private Volvo services as well, and can reach the temple without any trouble. 

Key Guidelines for Pilgrims Going to Tirupati for Darshan

To the Tirupati Venkateswar temple, it is a godly experience, although easier and fun to do by planning. Some of the major tips that will make your darshan easy are mentioned below:

Best Time to Visit the Temple:

  • The ideal month for a visit to the temple is from September to February since the weather at that time is quite nice.
  • At the big festivals like Brahmotsavam, you might be in the middle of a gigantic crowd.
  • Plan your trip in the middle of weekdays, instead of weekends, for a peaceful darshan. 

Dress Code for Men and Women 

Men: Wear a dhoti or any traditional attire with a shirt or any other clothes on top. 

Women: Dressed up in modest clothes like a Saree or Kurta. Wearing shorts or skirts is not permitted in the temple. 

Other Useful Tips

  • Book Tripurati darshan tickets in advance, online or offline, as they sell out really quickly. 
  • Always carry a valid ID proof like Aadhar or a passport as required during entry. 
  • Remove your shoes on the footwear counter near the temple. 
  • If you are going to hike the Trimulla hills, put on some casual shoes and bring a water bottle along.
  • Do not wear leather accessories such as a belt or shoes within the main shrine.
  • Try to go to the temple on weekdays to escape the crowd.
  • Don’t miss the tasty Tirupati Laddo Parsadham offered after the darshan. 

Conclusion 

A trip to Tirupati Balaji temple is a once-in-a-lifetime spiritual experience, where devotees from all around the world find peace and the blessings of the divine. To make your darshan more seamless, the Tirupati online booking service is the best option for a stress-free experience. 

However, the temple provided devotees with both offline and online darshan booking. In various forms of puja to seva, the temple provides the devotees with many options to relate themselves to their favourite God, Tirupati Vankestwar.

Therefore, regardless of the darshan of your choice, all of them make you feel that you are connected to the divine power and that they achieve whatever you want.

From free darshan to VIP ones, the booking procedure, and travel tips, we have provided all the important things in this article to make your Tirupati Balaji Trip hassle-free.

We hope this article by 99Panditji helps you in your journey to Tirupati Balaji temple. May god bless you with his divine grace and fill your life with happiness and joy.